संभल। हेपेटाइटिस-सी मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रोजाना जिला अस्पताल में करीब 40 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें युवा और बच्चे भी शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि टैटू गुदवाने की वजह से बच्चों को यह बीमारी चपेट में ले रही है।
हेपेटाइटिस सी से पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या चिंताजनक है। शहर, कस्बा के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को यह बीमारी चपेट में ले रही है। जिला अस्पताल में तैनात डॉ. आंचल मल्होत्रा ने बताया कि हेपेटाइटिस-सी के रोजाना 30 से 40 नए मरीज आ जाते हैं। ऐसे मरीजों को दवा की प्रथम डोज दी जाती है।
दूसरी और तीसरी डोज वाले मरीजों की संख्या भी हर एक दिन करीब 40 से 50 रहती है। रोजाना 15 से 20 प्रतिशत बच्चे इलाज के लिए आते हैं, जबकि युवाओं का आंकड़ा 30 से 35 प्रतिशत रहता है।
उन्होंने बताया कि संभल शहर के अलावा हयातनगर, सरायतरीन, भैंसोड़ा, बहजोई, देवरखेड़ा के मरीजों का इलाज चल रहा है। सबसे ज्यादा मनोटा और बनियाठेर के मरीज सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे हाथों पर टैटू गुदवा लेते हैं। इसलिए बच्चे भी हेपेटाइटिस सी से पीड़ित हो रहे हैं।
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दो अस्पतालों से दी जा रही दवा संभल। जनपद में दो अस्पतालों से हेपेटाइटिस सी से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इनमें जिला अस्पताल संभल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पवांसा पर मरीजों को दवा दी जाती है। दोनों स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। संवाद
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यह हैं हेपेटाइटिस सी लक्षण
हेपेटाइटिस सी के लक्षण जब दिखाई देते हैं तो थकान, बुखार, पेट दर्द, भूख न लगना और गहरे रंग का पेशाब शामिल हो सकता है। बाद में लिवर को क्षति होने लगती है। जिसमें पीलिया भी हो सकता है और आंखों का पीला पड़ना होता है। पैर सूजने लगते हैं। त्वचा पर मकड़ी जैसी रक्त वहिकाएं दिख सकती हैं।
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डॉक्टरों का कहना...
डॉक्टर कहते हैं कि टैटू गोदने में एक ही मशीन का बिना सफाई के लगातार इस्तेमाल होता रहता है। इसलिए हेपेटाइटिस-सी से बचाव के लिए शरीर के किसी भी हिस्से में टैटू गुदवाने से बचना चाहिए। इसके अलावा झोलाछाप एक सुई से कई लोगों को इंजेक्शन लगा देते हैं। ऐसी सुई का प्रयोग भी नहीं कराना चाहिए। नाई की दुकान पर उस्तरे से शेविंग के लिए एक ही ब्लेड का प्रयोग भी खतरनाक रहता है।