बहन के शव को देखकर फूट-फूट कर रोने वाले ममेरे भाई ने कहा कि उसे अहसास नहीं था कि उसकी बहन पर जुल्म ढाने वाले दरिंदे सामूहिक दुष्कर्म के बाद बहन को जिंदा जला देंगे। ममेरे भाई के स पहली कॉल शुक्रवार को रात्रि में 2.45 बजे आई। ममेरे भाई ने बहन को 100 डायल पर काल की सलाह दी। बहन ने कहा- काल उठ नहीं रही है। भाई ने कहा फिर से मिलाओ, लेकिन खुद एक भी कॉल पुलिस को तब तक नहीं की जब तक कि वह गांव नहीं पहुंच गया।
जैसा कि सामने आ रहा है उसके मुताबिक जिंदा जलाने की घटना तीन से चार बजे बीच की है। काश, ममेरे भाई ने पुलिस को फोन किया होता तो महिला की जान बच सकती थी। ममेरे भाई से यह पूछा गया कि बहन ने जिंदा जलाए जाने का अंदेशा व्यक्त किया था तो इसके बाद भी उसने पुलिस को फोन क्यों नहीं किया। इस पर ममेरे भाई ने बताया कि फोन आने पर उन्होंने यही सोचा कि महिला के सगे भाई और परिजनों को लेकर गांव जाकर देखेंगे कि मामला क्या है। इसके बाद पुलिस की मदद लेंगे।
ममेरे भाई ने बताया कि उसने सबसे पहले सगे भाई को फोन मिलाया। जब फोन नहीं लगा तो किसी को उनके घर भेजा। शनिवार की सुबह चार बजे के करीब सभी लोग रजपुरा में एकत्र हुए। इसके बाद बहन के गांव पहुंचे। ममेरे भाई न बताया कि अगर उन्हें इस घटना का आभास हुआ होता तो वह मौके पर पहुंचने से पहले की डायल 100 को फोन करते या फिर रजपुरा थाने से पुलिस को साथ लेकर जाते है। उनकी नासमझी से देर हो गई। अब बहन की हत्या करने वाले दरिंदों को सजा दिलाने के लिए लड़ाई लडे़ंगे।