उत्तर भारत के एक बड़े भूभाग के किसानों को यूरिया उर्वरक उपलब्ध कराने वाली जिले की सबसे बड़ी कंपनी टाटा केमिकल्स प्रा. लि. बबराला शनिवार की दोपहर विदेशी कंपनी (नार्वे) यारा इंटरनेशनल की हो गई। इसके साथ ही 1284 एकड़ जमीन में बनी टीसीएल और उसके 400 अधिकारी कर्मचारी भी नार्वे की कंपनी के अधीन हो गए। यारा इंटरनेशनल ने भारत में अपना नाम यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया प्रा.लि. रखा है। इसके साथ ही नार्वे राष्ट्र की उर्वरक बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी ने भारत में कदम रख दिया है।
दो साल पहले वर्ष-2016 में टाटा केमिकल्स प्रा.लि. बबराला को नार्वे की कंपनी यारा इंटरनेशनल ने खरीदने का शुरुआत की थी। टीसीएल के मुंबई और दिल्ली के कार्यालयों में बैठकर 2016 में ही 2670 र्कोड रुपये में डील को फाइनल कर दिया था। उत्तर भारत की सबसे बड़ी यूरिया उत्पादन कंपनियों में शुमार संभल जिले की टाटा केमिकल्स लिमिटेड (टीसीएल) बबराला 3500 टन यूरिया (70 हजार बोरी) का प्रतिदिन उत्पादन करती है। कंपनी में 400 अधिकारी कर्मचारी कार्यरत है। यहां से यूरिया खाद भारतीय फर्टिलाइजर्स मिनिस्ट्री के माध्यम से उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों को आपूर्ति किया जाता है।
नार्वे की कंपनी यारा इंटरनेशनल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक निर्माण क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में शुमार है। यारा इंटरनेशनल ने टीसीएल बबराला को खरीदने की सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली है। शनिवार को यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया प्रा.लि. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सहित पांच अधिकारी बबराला पहुंचे। यहां टीसीएल के हेड एस.भाष्कर ने उनका स्वागत किया।
ठीक 12.30 बजे टीसीएल को अधिग्रहण करते ही टीसीएल, यारा बन गई। 1284 एकड़ भूमि पर फैली टीसीएल व इसके द्वारा संचालित विद्यालय यारा के अधीन हो गई। इसके साथ ही सभी चार सौ अधिकारी कर्मचारी भी यारा के हो गए। यूनिट हेड एस.भाष्कर ने यारा का हेलमेटनुमा कैप पहन लिया। सभी ने तालिया बजाकर नई कंपनी में प्रवेश का स्वागत किया। टीसीएल के स्थान पर यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया का बोर्ड लगा दिया गया।
-अधिकारियों कर्मचारियों को आशंका थी कि कहीं विदेशी कंपनी का नया प्रबंधन तत्कालिक तौर पर कोई बदलाव या छटनी न कर दे, लेकिन यह आशंकाएं तब खत्म हो गईं, जब कंपनी के नार्वे से आए अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जो जिस पद पर जो कार्य कर रहा है, ज्यों का त्यों करता रहेगा। इसका सभी कर्मचारियों ने तालियां बजाकर स्वागत किया।
-सीसीएल उर्वरक फैक्ट्री परिसर में ही एक विद्यालय भी संचालित कर रहा है। सीबीएसई पैटर्न के इस विद्यालय में इंटरमीडिएट तक शिक्षण कार्य होता है, इसमें मौजूदा समय में 1100 बच्चे शिक्षार्जन कर रहे हैं। टीसीएल के हस्तांतरित होते ही इस विद्यालय का प्रबंधतंत्र भी यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया के हाथों में चला गया है।
-टीसीएल की डील तो 2016 में ही 2670 करोड़ रुपये में फाइनल हो गई थी। हस्तांतरण में दो साल का समय लग गया। 13 जनवरी-2018 को विधिवत तरीके से टीसीएल को यारा फर्टिलाइर्स इंडिया प्रा.लि. ने अपने अधिकार में ले लिया है। अब इसे यारा फर्टिलाइर की संचालित करेगी। किसी भी अधिकारी, कर्मचारी को चिंता करने की जरूरत नहीं है, वह ज्यों के त्यों ही कार्य करते रहेंगे, उनका भविष्य बेहतर ही होगा।
-आरएन राय, प्रशासनिक अधिकारी यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया प्रा.लि. बबराला