संभल के मखदूपुर स्थित यूनानी मेडिकल कालेज में होटल से निकाले गए कोरोना योद्घाओं पर फूल बरसाते चि?
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संभल। एक ओर कोरोना योद्धाओं को फूल बरसाकर सम्मानित किया जा रहा है। वहीं कोरोना योद्धाओं को होटल से निकालने वाले होटल मधुवन के मालिक पर प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मेहरबान दिखाई दे रहा है। अब तक होटल मालिक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। न उन्हें गिरफ्तार किया गया है और न होटल मालिक ने जमानत के लिए पुलिस से संपर्क किया है। जबकि पुलिस कई मामूली मामलों में काफी सख्ती दिखाती नजर आती है। ऐसा लगता है कि कोरोना से लड़ रहे इन चिकित्साकर्मियों का मामला पुलिस की निगाह में अहम नहीं है। इसीलिए नियमों के आधार पर कार्रवाई का हवाला दिया जा रहा है। जबकि अन्य किसी भी मामले में ऐसा दिखाई नहीं देता।
रविवार की सुबह कोरोना योद्धाओं की नौ सदस्यीय चिकित्सा कर्मियों की टीम को कोतवाली क्षेत्र के आलम सराय स्थित होटल मधुवन के मालिक ने गाली गालौज कर निकाल दिया था। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को हुई तो मामला दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन अमर उजाला ने पूरे मामले को प्रमुखता से छापा। इसके बाद कार्रवाई तो हुई पर पुलिस का रवैया अब भी नरम है। यही कारण हैं जो अब तक आरोपी होटल मालिक पकड़ा नहीं गया है। हालांकि दर्ज किया गया मामला जमानतीय श्रेणी में आता है, लेकिन नियम यह भी है कि विशेष मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है। पर इसमें ऐसा नहीं हुआ।
चिकित्सकों में रोष है। दरअसल होटल मधुवन में प्रशासनिक अधिकारियों के कहने पर तीन चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों समेत नौ लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी। इन सभी चिकित्सा कर्मियों की ड्यूटी हकीम रईस यूनानी मेडिकल कालेज में बने आइसोलेशन वार्ड व क्वारंटीन केंद्र में लगी हुई है। इसलिए वे होटल में ठहरे थे, लेकिन होटल मालिक ने पहले दिन से ही असुविधा देनी शुरू कर दी। इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी पर सुनवाई नहीं हुई।
रविवार को होटल मालिक ने पानी की आपूर्ति बंद कर दी। जिसकी जानकारी चिकित्सक कर्मियों ने दी तो होटल मालिक ने मोहल्ले वासियों में पनपे रोष की जानकारी दी और होटल से निकल जाने की बात कही। जब चिकित्साकर्मियों ने विरोध किया तो होटल मालिक ने गाली गलौज कर होटल से निकाल दिया। इसकी रिपोर्ट दर्ज की गई है पर आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लिस अधिकारी विवेचना और बयान के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं। जबकि मामला गंभीर है। देश के अन्य राज्यों में भी कोरोना योद्धाओं से अभद्रता और मारपीट की गई है। जिसमें सरकार और पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है, लेकिन संभल में ऐसा नहीं है।
पूरे प्रकरण को मैंने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। क्योंकि सात वर्ष से कम सजा वाले अपराध में गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है। इसलिए गिरफ्तारी नहीं की गई है लेकिनदर्ज मामले में पुलिस की विवेचना चल रही है। विवेचना के दौरान साक्ष्यों का संकलन होगा और डाक्टरों के बयान लिए जाएंगे। कार्रवाई भी होगी।
यमुना प्रसाद, पुलिस अधीक्षक, संभल।