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जिला अस्पताल में सिस्टम बेहालः नाश्ता मिलेगा पर दोपहर और रात का भोजन नहीं

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संभल। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ऐसा नियम है जिस पर मरीज सवाल उठा रहे हैं। इमरजेंसी में अगर कोई मरीज भर्ती होता है तो उसे नाश्ता तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिया जाता है पर दोपहर और रात का भोजन नहीं मिलता क्योंकि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के पास स्थिति स्पष्ट नहीं है।
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जिला अस्पताल की यह स्थिति काफी समय से चल रही है। आखिर चले भी क्यों नहीं। क्योंकि जिम्मेदारों को इसकी जानकारी ही नहीं है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक इस मामले में जांच कराने की बात कह रहे हैं और क्वालिटी मैनेजर ने कोटेशन पास नहीं होने का हवाला दिया है।
बहरहाल इस अव्यवस्था की मार भर्ती मरीजों को झेलनी पड़ रही है। सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में इमरजेंसी वार्ड सबसे अहम होता है। जिसमें सारी व्यवस्थाओं को पूरा करने के लिए शासन से भी आदेश होता है। क्योंकि वार्ड ही इमरजेंसी है। लेकिन जब इमरजेंसी वार्ड में भोजन की व्यवस्था नहीं होगी तो मरीज कहां से भोजन करेगा, यह सवाल अहम है।
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हमें इमरजेंसी के बारे में नहीं मिल रही कोई गाइडलाइन
संभल। सीएमओ डा. अमिता सिंह का कहना है कि इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के लिए मेरे पास कोई गाइड लाइन नहीं है। हम इस बारे में अपर निदेशक कार्यालय से जानकारी हासिल करेंगे। जहां तक नाश्ता देने और भोजन न देने का सवाल है, ऐसा क्यों हैं? इस बारे में सीएमएस ही जानकारी दे सकते हैं।
यह है मरीजों की बात
संभल। इमरजेंसी वार्ड में रजपुरा थाना क्षेत्र के गांव मोलनपुर निवासी नेकसी पत्नी दिलीप गुरुवार को भर्ती मिलीं। महिला ने बताया वह पिछले शुक्रवार से भर्ती है। गांव के कुछ दबंगों ने उन्हें मारपीट कर घायल कर दिया था। जब महिला से भोजन की जानकारी की तो उन्होंने बताया कि बाहर से या घर से भोजन नहीं आ नहीं सकता। इसलिए सुबह में जो नाश्ता मिलता है, उससे ही दोपहर और रात का गुजारा कर लेती हैं।
धनारी थाना क्षेत्र के गांव मडावली निवासी वर्षा ने बताया कि उसको बुखार है। गुरुवार को सुबह ही भर्ती हुई हैं। नाश्ता या दोपहर का भोजन नहीं दिया गया है। बाहर से दूध मंगाकर पिया है। रजपुरा थाना क्षेत्र के गांव पतेई नासर निवासी हरप्यारी पत्नी मेघनाद ने बताया कि वह बुधवार को भर्ती हुई। सुबह में ही नाश्ता मिला है। भोजन की कोई व्यवस्था नहीं है।
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