संभल के गांव भदरौला में सरकारी हैंडपंप से निकला पानी दिखाती किशोरी।
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संभल। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध न होने से संभल जिले के भदरौला गांव में लोग दूषित पानी पी रहे हैं। गांव के हैंडपंपों में आर्सेनिक और नाइट्रेट की मात्रा खतरनाक स्तर तक है। कई सरकारी हैंडपंपों पर लाल निशान लगा दिए गए हैं लेकिन स्वच्छ पेयजल के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जो लोग सक्षम हैं, उन्होंने अपने खर्चे पर सबमर्सिबल पंप की बोरिंग कराई है जो सक्षम नहीं हैं वे पड़ोस से पानी मांग लेते है जिन्हें पड़ोसी से भी पानी नहीं मिलता वे हैंडपंपों का प्रदूषित पानी पी रहे हैं। पानी ऐसा है जो एक से डेढ़ घंटे में पीला पड़ जाता है। पीला पानी पीने से लोग बीमार भी पड़ रहे हैं। आर्सेनिक की मात्रा एक लीटर पानी में 0.010 मिलीग्राम होनी चाहिए लेकिन भदरौला में गांव के सरकारी हैंडपंपों के पानी में यह मात्रा 0.016 मिलीग्राम तक पाई गई है।
भदरौला निवासी होराम सिंह ने बताया कि उनके घर में लगा हैंडपंप खराब हो गया। सरकारी हैंडपंप का पानी पीने के लिए लाते हैं। यह पानी जिस बर्तन में रखते हैं उस बर्तन का तला पीला पड़ जाता है। जब हैंडपंप से पानी निकालते हैं तब तो वह साफ दिखता है लेकिन एक से डेढ़ घंटे में पूरा पानी पीला नजर आता है। आमतौर पर इसे उबाल कर पीते हैं लेकिन जब जल्दी होती है तो ऐसे ही पी जाते हैं।
होराम सिंह ने बताया कि घर में आए दिन कोई न कोई बीमार रहता है। गांव में अस्पताल तो है नहीं, इसलिए मेडिकल स्टोर से दवा लाकर काम चला लेते हैं। इसी गांव के ओमप्रकाश ने बताया कि गांव में फिल्टर का पानी बिकने लगा है लेकिन हर व्यक्ति इसको खरीद पाने के लिए सक्षम नहीं है। एक दिन के लिए 20 लीटर पानी की कैन 20 रुपये में मिलती है। हर रोज इतना रुपये कहां से खर्च करें। इस स्थिति को देखते हुए जल निगम ने गांव के लिए स्वच्छ पेयजल की योजना दो वर्ष पहले बनाई थी लेकिन पानी अब तक नसीब नहीं हुआ।
अगर हैंडपंप से न आए स्वच्छ पेयजल तो उबाल कर पिएं पानी
चिकित्साधिकारी डा. नीरज शर्मा ने बताया कि दूषित पानी से किडनी और लीवर पर असर पड़ता है। सबसे पहले पेट खराब होता है और फिर शरीर के दूसरे हिस्से प्रभावित होते हैं। यहां तक कि कैंसर तक का खतरा रहता है। लोगों को चाहिए कि हर हाल मे पानी साफ पिएं। अगर हैंडपंप से साफ पानी न मिले तो जो पानी है उसे उबाल कर ठंडा करके सेवन करें।
गांव का सर्वे तो हुआ पर पानी नसीब नहीं हुआ
संभल। भदरौला निवासी संजीव गांधी ने बताया कि गांव में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सर्वेक्षण कराया गया। पेयजल योजना भी बनी पर अभी तक पानी नसीब नहीं हो सका। अब गांव वाले सवाल करते हैं कि स्वच्छ पेयजल के लिए कब तक सिर्फ सपना ही देखते रहेंगे।