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नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्घिदात्री की आराधना, देवी मंदिरों में हुई विश्व कल्याण की प्रार्थना

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संभल। चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन देवी भगवती के नौवें स्वरुप मां सिद्घिदात्री की या देवी सर्वभूतेषुं लक्ष्मी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: के जाप के साथ उपासना की गई। भक्तों ने मां की आराधना कर विश्व में सुख समृद्घि के लिए कामना की।
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यूं तो अधिकांश भक्त नवरात्र की अष्टमी पर कन्या बरूओं को जिमाकर अपने व्रत खोल देते हैं लेकिन कुछ पूरे नौ दिन का उपवास रखते हैं। इसी कड़ी में बुधवार को मां सिद्घिदात्री की पूजा अर्चना की गई। पंजू सराय कार्यालय पर शिव गोरख मंदिर समिति द्वारा आयोजित मां दुर्गा स्तवन की 82वीं कड़ी के तहत मां सिद्घिदात्री की पूजा अर्चना की गई। महायज्ञ किया गया। इसमें कोरोना के शीघ्र ही खात्मे और भगवान श्री कल्कि के शीघ्र प्राकट्य की कामना की गई। आध्यात्मिक गुरु पंडित राधेश्याम श्रीमाली ने कहा कि कमल के आसन पर विराजमान मां सिद्घिदात्री के चरणों में सिंह विराजमान रहता है। माता अपने स्वरुप की माया से सारे जगत को मोहित किए रहती हैं। इस दौरान पप्पू, पार्थ, कृष्ण कुमार, सुभाष आर्य, अन्नाबाबू, विजयपाल, योगेश, नितिन कुमार, मनोज श्रीमाली आदि रहे।
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