चंदौसी। प्राकृतिक परीक्षण एप के माध्यम से अब मरीजों का उपचार किया जाएगा। इस एप के माध्यम से मरीज के त्रि-दोषों का पता लगाया जा सकेगा। जिसके आधार पर आयुर्वेदिक, यूनानी व होम्योपैथिक चिकित्सक मरीज का उपचार कर सकेंगे। साथ ही यह एप संबंधित मरीज को मौसम के आधार पर बीमारियों को लेकर भी सचेत करेगा।
प्राकृतिक परीक्षण एप के माध्यम से मरीजों का डाटा एकत्र किया जाने लगा है। इसके लिए आयुष से जुड़े आयुर्वेदिक, यूनानी व होम्योपैथिक के चिकित्सकों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। नगर के सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सक अभय शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार हर किसी व्यक्ति की जन्म से ही प्रकृति निर्धारित होती है। जोकि वात, पित्त और कफ से मिलकर बनी होती है। जिनको त्रि- दोष के नाम से भी जाना जाता है।
प्रत्येक दोष की अपनी विशेषताएं, गुण और कार्य होते हैं। दोषों के असंतुलन और विकृति के कारण से हमारा शरीर बीमार पड़ता है। असंतुलन का कारण अनुचित आहार, खराब जीवन शैली और दिनचर्या व तनाव है। बताया कि प्राकृतिक परीक्षण एप व्यक्ति की प्रकृति से संबंधित जानकारी एकत्र करता है।
इसे मोबाइल पर डाउनलोड कर स्वास्थ्य व शरीर संबंधी 23 से अधिक प्रश्नों के जवाब देने होते हैं। इसके बाद एप व्यक्ति की प्रकृति से संबंधित परेशानी और उसके बचाव की नोटिफिकेशन मोबाइल पर देगा। साथ ही मौसम बदलने पर भी बचाव के संकेत देगा।
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अभी 25 दिसंबर तक अभियान चलाकर सरकारी आयुर्वेदिक हॉस्पिटल पर ही प्रकृति एप पर मरीजों का डाटा एकत्र किया जा रहा था। लेकिन अब आयुर्वेदिक कॉलेजों में प्रकृति परीक्षण एप पर मरीजों का डाटा एकत्र किया जा रहा है। जल्द ही आशाएं आयुष के हेल्थेनस सेंटराें पर प्राकृतिक परीक्षण एप पर मरीजों का डाटा एकत्र करेंगी।
डॉ. अमर दीप सिंह नायक, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी
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