संभल। गांव भिरावटी स्थित श्री हरि बाबा महाराज के आश्रम में आयोजित श्री मद्भागवत कथा के चौथे दिन सुबह हवन यज्ञ किया गया। हवन यज्ञ में आहूतियां देकर यजमानों ने विश्व कल्याण की कामना की। शाम को श्री धाम वृंदावन से आए आचार्य दिनेश चंद्र महाराज द्वारा सती चरित्र, ध्रुव चरित्र व कपिल अवतार के प्रसंगों का वर्णन किया। बताया कि भगवान विष्णु ने पांचवा अवतार कपिल मुनि के रूप में लिया। इनके पिता का नाम महर्षि कर्दम व माता का नाम देवहूति था। शरशय्या पर पड़े हुए भीष्म पितामह के शरीर त्याग के समय वेदज्ञ व्यास आदि ऋषियों के साथ भगवान श्री कपिल मुनि जी भी वहां उपस्थित थे। भगवान कपिल मुनि जी सांख्य दर्शन के प्रवर्तक हैं। श्री गुरू भगवान कपिल महामुनि जी भागवत धर्म के प्रमुख बारह आचार्यों में से एक हैं। बताया कि भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में भाग लेने पहुंच गईं। यज्ञ में भगवान शिव का आमंत्रण और उनका भाग न दिए जाने पर कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया। इस दौरान डा. परविंदर यादव, महेश दत्त, छवि, नरेंद्र कुमार शर्मा, विनोद शर्मा आदि लोग मौजूद रहे।