जहां सिर पर तंबू की चादर तो जमीन पर बिछी पुआल और उसपर बिछी चादर-गद्दे। न सर्दी का एहसास और न किसी बात की फिक्र। हर नमाज के बाद कुरान-ए-पाक और हदीस की रोशनी में दीन की बातें और उसपर अमल करने नसीहत करते उलमा। कुछ ऐसा नजारा था संभल के वाजिदपुरम में शुरू हुए इज्तिमा का। जहां उलमा की सरपरस्ती में नई तब्लीगी जमात देशभर में निकलेगी। जो मुसलमानों को दीनदार बनाने का काम करेगी।
शनिवार को संभल-मुरादाबाद रोड पर तीन दिनी इज्तिमा की शुरुआत हुई। इज्तिमा में प्रदेश भर से तब्लीगी जमात पहुंची है। इज्तिमा में पहुंचने लोगों के लिए पांच किमी के दायरे में तंबुओं का शहर बसाया गया है। यहां रहने, खाने, नमाज, वजूखाने सहित सभी सुविधाएं मौजूद रहे। तंबुओं के इस शहर के सबसे बड़े शामियाने में जमात के साथ नमाज अदा की जा रही है। वहीं फज्र, जोहर, अस्र और मगरिब की नमाज के बाद उलमा अपने तकरीर में दीन की बातें कर रहे हैं। युवाओं और बुजुर्गों से समाज में इस्लाम के सही किरदार पेश करने की अपील की जा रही है।
सिरसी से संभल तक जगह-जगह हुआ इस्तकबाल
हर तकरीर में दीन की राह पर निकलने के लिए नई जमात तैयार हो रही है। उत्साहित अकीदतमंद अपने नाम लिखवा रहे हैं। उम्मीद है कि इज्तिमा से छह सौ से अधिक नई तब्लीगी जमात यहां से निकलेगी। इनका मकसद घर-घर पैगाम-ए-नबी को पहुंचाना है। भटके मुसलमानों को दीनदार बनाना है।
सिरसी से संभल तक जगह-जगह हुआ इस्तकबाल
संभल। इज्तिमा को लेकर मुरादाबाद से ही इस्तकबालिया कैंप शुरू हो गए लेकिन सिरसी से संभल तक तो जगह जगह कैंप लगाए गए थे। सैकडों लोग ऐसे थे व्यवस्थाओं में भागीदारी कर रहे थे। कैपों में लोगों का इस्तकबाल किया गया। नरौली में मदरसे के बाहर संभल-चंदौसी मार्ग पर कैंप लगाए गए। वहीं बहजोई और हसनपुर मार्ग पर भी कैंप लगाए गए।
दीनी सीख से सफल होगा जीवन
बड़े बुजुर्गों के साथ इज्तिमा में युवाओं के पहुंचने का सिलसिला शनिवार को देर रात तक जारी रहा। युवाओं ने तकरीर सुनने के साथ ही विभिन्न इंतजामों में आगे बढ़कर सहयोग किया।संभल के साथ साथ विभिन्न स्थानों से आए युवाओं का कहना था कि यदि अभी से दीनी सीख के हिसाब से जिंदगी गुजारना सीख गए तो आगे का जीवन सफल हो जाएगा। दीपासराय निवासी 28 वर्षीय अनस वैसे तो ट्रांसपोर्टर हैं लेकिन दीनी इज्तिमा में भागीदारी के लिए उन्होंने अपने कारोबार से तीन दिन की मोहलत ली है। इजित्मा शुरू होने से पहले वे इंतजामों में शरीक हुए और अब वहां तकरीरें सुन रहे हैं। यही स्थिति पंजू सराय निवासी शुएब अब्बासी की है। वह फल फ्रूट की आढ़त चलाते हैं। आठ दिनों से इज्तिमा स्थल में हैं और अपना कैंप लगाए हैं।