इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
जमात-ए-निसवां अलमहमूदिया की ओर से तहफ्फुज-ए-शरीयत कांफ्रेंस का आयोजन संभल के महमूद खां सराय में किया गया। इसमें अलीगढ़ से आईं मुख्य वक्ता डा. बाजिगा तबस्सुम ने तीन तलाक के मामले पर कहा कि इस धरती पर इस्लाम ने सबसे पहले महिलाओं को अधिकार दिए हैं। इस्लाम से हटकर जो भी कानून बनाया जाएगा वह महिलाओं के खिलाफ ही बनाया जाएगा।
इस्लाम ने महिलाओं को निकाह के वक्त रजामंदी का अधिकार दिया है। पिता की विरासत में बेटी का और शौहर की संपत्ति में पत्नी को भी हक दिया है। अगर पुरुष शरीयत की रक्षा में कुर्बानी देने से पीछे हटे तो महिलाएं इस्लाम की रक्षा के लिए आगे आएंगी। सायमा अंजुम साहिबा ने कहा कि यदि मुस्लिम समाज में महिलाओं पर अत्याचार हो रहे होते तो इतनी बड़ी तादात में महिलाएं यहां मौजूद नहीं होतीं।
जो लोग मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकार देने की बात कर रहे हैं वे उन विधवाओं को इंसाफ दिलाएं जिनके पति गुजरात के दंगों में मार दिए गए हैं। बुशरा बेगम, समराह बेगम ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रपति के नाम चार सूत्रीय ज्ञापन उप जिलाधिकारी अखिलेश यादव को सौंपा। रूकय्या बेगम, अरमाना बेगम, गय्यूर बेगम, शहनाज बेगम, फिरदोस बेगम का योगदान रहा।
महमूद खां सराय के करीम मैरिज हाल में सुबह दस बजे से दो बजे तक कांफ्रेंस चलीं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही। महिलाओं की भीड़ को देखते हुए एसडीएम अखिलेश यादव खुद मौके पर पहुंचे। इस मौके पर मोहम्मद मियां कासमी, ममलूकर्रहमान बर्क, शहजाद खां, मौलाना जकारिया, सुएब भाई समेत तमाम लोगों ने भागीदारी की। मदरसा सिराजुल उलूम गर्ल्स की छात्राओं ने नतिया प्रोग्राम पेश किए।
महमूद खां सराय से नखासा चौराहे तक पैदल मार्च संभल। कांफ्रेंस स्थल से नखासा चौराहे तक महिलाओं ने पैदल मार्च किया। इस दौरान शरीयत महिलाओं ने कहा कि शरीअत हमारी जान, शरीअत हमारी शान है। इसे हम खत्म नहीं होने देंगे। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में मदाखलत बर्दाश्त नहीं जैसे नारे लगाए।