संभल में इस समय महिष्मती नदी की स्थिति ऐसी दिखती है। संवाद
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संभल। एक जमाना था जब संभल में सोत नदी के साथ महिष्मती नदी भी बहती थी। इसको वर्तमान में लोग भैंस नदी के नाम से जानते हैं। लेकिन दशकों पहले इन नदियों का वजूद मिट गया। सोत नदी का पुनरुद्धार तो हुआ है लेकिन महिष्मती नदी पर पूरी तरह से कब्जा है। पालिका भी जलनिकासी के रूप में काम ले रही है। देखने पर यह नाला ही लगती है। महिष्मती नदी की जमीन पर कब्जे कर लिए गए हैं और कहीं-कहीं तो जमीन पर खेती हो रही है। अब संभल पालिका इन कब्जों की पैमाइश कराएगी और उसके बाद मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
महिष्मती नदी का वजूद संभल में देहली दरवाजा से होते हुए चौधरी सराय और हल्लू सराय तक दिखता है। पूर्व के वर्षों में कई बार अतिक्रमण हटाने के अभियान चले लेकिन वह नाकाफी साबित हुए। अब मुख्यमंत्री ने महिष्मती नदी पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च कर पुनरुद्धार कराने की बात कही है। इसके बाद से पालिका सक्रिय है। ईओ मणिभूषण तिवारी का कहना है कि राजस्व विभाग से पैमाइश कराई जाएगी। बताया कि संभल-हसनपुर मार्ग पर गांव हबीबपुर से महिष्मती शुरू होने की जानकारी मिलती है जो चंदायन से आगे सोत नदी में जाकर मिलती है।
बताया कि इस नदी पर प्राथमिक जांच पड़ताल में सामने आया है कि शहर में तमाम लोगों ने कब्जे कर लिए हैं और शहर से बाहर लोग खेती कर रहे हैं। इसलिए पहले ड्रोन से मैपिंग कराएंगे। इसके बाद कब्जा मुक्त करने की कार्रवाई शुरू होगी।