उन्होंने समर्थकों संग पार्टी से किनारा करते हुए चुनावी मैदान में उतरने का एलान भी कर दिया है। चर्चा है कि सपा के दिग्गज रहे दद्दा अपने पौत्र या पौत्रवधू को सपा प्रत्याशी के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ा सकते हैं।
समाजवादी पार्टी में टिकट वितरण के बाद शुरू हुआ बगावत का दौर थमता नहीं दिख रहा है।
संभल में कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद को पूर्व सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के पौत्र जियाउर्रहमान बर्क और असमोली में विधायक पिंकी यादव को रामसरन यादव चुनौती देने का पहले ही एलान कर चुके हैं। अब सपा के गढ़ गुन्नौर से पार्टी को नई चुनौती मिली है। यहां मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे पूर्व एमएलसी ऋषिपाल सिंह दद्दा ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने रविवार को डिग्री कालेज में समर्थकों संग बैठक कर सपा से नाता तोड़ने और निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया। बैठक में मुख्यमंत्री के चचेरे भाई/बदायूं सांसद धर्मेंद्र यादव के करीबियों ने भी शिरकत की। सभी ने एक सुर में पार्टी के दोबारा राम खिलाड़ी सिंह यादव को टिकट देने के निर्णय को खारिज कर दिया। इस मौके पर दद्दा ने कहा कि पार्टी को राम खिलाड़ी के विरोध के बावत बता दिया गया था।
लेकिन, हाईकमान ने क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर दिया। इसलिए हम सपा प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। इस मौके पर कुछ समय पहले सपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक राजेश यादव भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि सपा हाईकमान ने उन पार्टी सिपाहियों को दरकिनार किया, जिन्होनें कड़ी मेहनत की। भूपेंद्र सिंह यादव उर्फ काली यादव ने कहा कि सपा में सिर्फ से पक्षीय तबज्जों मिलने से दम घुट रहा था। गुन्नौर के ब्लॉक प्रमुख पति अशोक कुमार उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि हम कभी भी सपा के बिचौलियों का साथ नहीं दे सकते है। जिला पंचायत सदस्य रूपकिशोर यादव, डा.कुंवरपाल सिंह आर्य, ओमपाल यादव आदि ने सपा का विरोध किया।
एक मात्र सपाई चरन सिंह यादव ने अलग बयानबाजी करते हुुए कहा कि हम सपा के साथ हैं कि प्रत्याशी के न तो साथ होंगे और ही विरोध करेंगे। हम मीटिंग में बुलावे पर आए है। इसके अलावा रामबाबू यादव, योगेश यादव, सुमित यादव, देवेंद्र यादव, मुकेश यादव, रविशंकर, झम्मन सिंह, चरन सिंह, तेजपाल आदि उपस्थित रहे।
पौत्र या पौत्रवधू को भी चुनाव में उतार सकते हैं
बबराला। पूर्व एमएलसी ऋषिपाल दद्दा को सपा प्रत्याशी रामखिलाड़ी सिंह यादव का राजनीतिक गुरू भी माना जाता है। लेकिन, अपने परिवार की राजनीति को जीवंत रखने के लिए उन्होंने सांसद से अपने पौत्र सुमित यादव को टिकट देने की पैरवी की थी। वह सभाओं में मौजूदा विधायक का भी कई बार विरोध करते नजर आए। इससे विधायक व उनके बीच तल्खी बढ़ गई थी। दद्दा ने कहाकि उन्होंने भी पर्चा खरीदा है, लेकिन वह पौत्र सुमित यादव व पौत्रवधू मोनिका यादव को भी चुनाव मैदान में उतार सकते हैं। इस पर शीघ्र निर्णय ले लिया जाएगा।
दद्दा हमारे राजनीतिक गुरु हैं, हमेशा रहेंगे : राम खिलाड़ी यादव
-सियासत में ऋषिपाल सिंह दद्दा हमारे भीष्म पितामह हैं, गुरु हैं। उनके आशीर्वाद से ही हम राजनीति सीढ़ियां चढ़ते आए हैं, उनके दिल में हमारे लिए जगह है, हमेशा रहेगी। वे यदि कोई बाण चलाते हैं तो हम सहेंगे लेकिन मैं कोई बाण नहीं चलाऊंगा। दद्दा को पार्टी के साथ रहना चाहिए था लेकिन हो सकता है कि उनकी कोई मजबूरी हो। मुझे उम्मीद हैं कि वह हमारे विरोध में नहीं जाएंगे।
चंदौसी(ब्यूरो)। चंदौसी की सीट सपा-कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस के खाते में चली गई है। इसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष विमलेश कुमारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है। बता दें कि शनिवार को सपा ने छोटेलाल दिवाकर को उम्मीदवार घोषित किया था।
सपा ने पहले तो श्रीपाल दिवाकर को चंदौसी सीट से प्रत्याशी घोषित किया, लेकिन तभी सपा में रॉर और तेज हो गई तथा अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उन्होंने नई सूची जारी की, जिसमें राज्य सभा सदस्य जावेद अली खां के करीबी छोटे लाल दिवाकर को प्रत्याशी घोषित किया।
छोटे लाल दिवाकर आज ही टिकट लेकर चंदौसी पहुंचे थे, उनका कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत भी किया था लेकिन तभी कांग्रेस के साथ गठबंधन की कवायद एक बार फिर तेज हो गई। इससे लोगों की निगाहें लखनऊ की गतिविधियों पर टिक गई। देर रात करीब नौ बजे के बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन की जो सूची जारी हुई, उसमें चंदौसी सीट कांग्रेस के खाते में चली गई।
कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष विमलेश कुमारी को चंदौसी सीट से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। जिससे कांग्रेस व उसके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विमलेश कुमारी ने बताया कि सूची जारी हो गई है, चंदौसी सुरक्षित सीट से उन्हें सपा-कांग्रेस का संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया गया है।