चंदौसी। कड़ाके की ठंड के बीच शहर से लेकर गांव तक आवारा कुत्तों व बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गलियों, चौराहों में घूम रहे कुत्ते व बंदर राह चलते लोगों पर अचानक हमला कर रहे हैं। सीएचसी में हर रोज सौ से डेढ़ सौ लोग एंटी रैबीज की डोज लगवाने के लिए आ रहे हैं। अब सीएचसी में रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन सीरम भी उपलब्ध होने से होने गंभीर मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा।
शहर से लेकर देहात क्षेत्र की गालियों में कुत्तों व बंदरों के झुंड देखे जा रहे हैं। खासतौर पर अलाव जलने वाली जगहों पर कुत्ते घंटों बैठे रहते हैं और वहां से गुजरने वाले लोगों पर अचानक झपट्टा मार देते हैं। सुबह और शाम के समय बच्चों को स्कूल भेजना भी जोखिम भरा हो गया है। महिलाएं और बुजुर्ग अकेले बाहर निकलने से कतरा रहे हैं।
आलम ये है कि सीएचसी में एंटी रैबीज इंजेक्शन कक्ष के बाहर हर रोज कुत्ता व बंदर काटे लोगों की लंबी लाइन लग रही है। कई मरीज आसपास के गांवों से लंबी दूरी तय कर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इस संबंध में सीएचसी के सीएमएस डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि खासकर भोजन न मिलने की वजह से कुत्ते हमलावर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि सीएचसी में एंटी रैबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और आने वाले सभी मरीजों को वैक्सीन लगाई जा रही है। बताया कि कुत्ते के काटने की स्थिति में घाव को तुरंत साफ पानी से धोएं और बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें। समय पर इलाज और वैक्सीन ही रैबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव का सुरक्षित तरीका है। संवाद