संभल। जब से कोरोना वायरस का हमला हुआ है तब से चीन में भारतीय मेंथा आयल और मेंथॉल उत्पादों की नई खपत नहीं निकल रही है। इससे निर्यात तो पहले ही प्रभावित हो गया था लेकिन अब इसका असर खुदरा बाजार तक आया है। इससे मेंथा उत्पादक किसान भी प्रभावित होने लगे हैं। तेजी की उम्मीद कर रहे किसानों को मंदी के दौर का सामना करना पड़ रहा है। बाजार भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक एक महीने के भीतर टूट चुके हैं। आगे क्या होगा, इस पर किसानों और व्यापारियों की निगाह लगी हुई है।
चीन में 2 फरवरी तक नव वर्ष का अवकाश चल रहा था और यह उम्मीद की जा रही थी कि नव वर्ष की छुट्टियां खत्म होने के बाद मेंथा आयल तथा मेंथॉल उत्पादों की नई मांग निकलेगी पर कोरोना वायरस के हमले की वजह से ऐसा नहीं हुआ। संभल से मेंथा और मेंथॉल उत्पादों का 3000-3500 करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात है। इसमें चीन की खपत 1500-2000 करोड़ रुपये वार्षिक की है। चीन की खपत को लेकर फिलहाल विराम है।
चीन में मंगलवार को वहां की फर्में खुलनी थीं और पुराने भुगतान आतेे तथा नई खरीद के लिए भी अनुमोदन मिलते पर वहां पर मंगलवार में कार्यालय नहीं खुले न ही कारोबार सुचारू हुआ। वायरस के हमले से पैदा हुए हालात ने कारोबार पर असर बरकरार रखा।
निर्यातक आशुतोष रस्तोगी ने बताया कि नई डिमांड सामने न आने का असर अब मेंथा की घरेलू कीमतों पर पड़ा है। यदि यही हाल रहा तो आगे भाव और भी कम हो सकते हैं। फिलहाल की स्थिति में एक महीने में भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम कम हो गया है। संभल में पिछले महीने जिस मेंथा आयल का भाव 1300-1350 रुपये प्रति किलोग्राम था वही मेंथा आयल इस महीने 1200-1250 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है।