चंदौसी। शहर मेंथा कारोबार में लगातार गिरावट आती जा रही है। सिंथेटिक मेंथाॅल से चंदौसी का मेंथा कारोबार दम तोड़ रहा है। पिछले चार साल में कारोबार आधा रह गया है। कई छोटी-बड़ी मेंथा की इकाइयां भी बंद हो गई हैं। कारोबारियों का कहना है कि इस संदर्भ में मेंथा की विभिन्न एसोसिएशन के माध्यम से केंद्र व प्रदेश सरकार को पत्र भेज कर सिंथेटिक मेंथाॅल कारोबार पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग कर चुके हैं। हालांकि प्रयास जारी है। सिंथेटिक मेंथाॅल पर रोक नहीं लगी तो क्षेत्र से मेंथा का कारोबार खत्म हो जाएगा।
1996 में आयी तेजी के बाद चंदौसी का मेंथा कारोबार भी बुलंदियों को छूने लगा था। वहीं 1998 में मुंबई में चंदौसी से भेजे गए बोल्ड क्रिस्टल में कल्मी सोडा की मिलावट पकड़ी गई। इससे चंदौसी मंडी के नाम पर दाग लग गया। इसके बावजूद नगर के प्रतिष्ठित व्यापारियों ने कारोबार की पहचान को बरकरार रखा। पिछले चार साल से पेट्रोलियम पदार्थ से बनने वाला सिंथेटिक मेंथा बाजार में उतर गया। चाइना और मलेशिया से सिंथेटिक मेंथाॅल की सप्लाई होती है। बाजार में सिंथेटिक मेंथाॅल आने से मंदी का दौर शुरू हो गया। कारोबार पर खासा असर पड़ा है। मेंथा की इकाइयां बंद हो गईं। चार साल में कारोबार पर और भी असर पड़ा और यहां छोटी-बड़ी 55 इकाइयों में से घट कर 20-25 रह गईं, जिनमें बड़ी इकाई 3-4 ही हैं। बाकी सभी मध्यम हैं।
2500 करोड़ से घट कर 1200 करोड़ का रह गया सालाना टर्नओवर
चंदौसी मे मेंथा कारोबार का टर्नओवर पिछले वर्षों में 2500 करोड़ रुपये सालाना का था। कारोबारी भुवनेश वार्ष्णेय ने बताया कि कारोबार की आज की स्थिति जाने तो बाजार में सिंथेटिक मेंथाॅल की खपत अधिक होने और वायदा कारोबार को बढ़ावा मिलने से सालाना टर्नओवर घट कर 1200 करोड़ रुपये रह गया है। सिंथेटिक मेंथाॅल करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ता है।
-
इन प्रदेशों से जुड़ा है मेंथा कारोबार
चंदौसी का मेंथा कारोबार मुंबई, गुजरात, तमिलनाडु से जुड़ा है। चंदौसी से मेंथा बोल्ड क्रिस्टल तैयार होकर इन प्रदेशों में जाता है। इसके अलावा अमेरिका और यूरोप इसकी बड़ी मंडी है।
-
उचित मूल्य न मिलने पर किसानों का हो रहा मोह भंग
मेंथा ऑयल का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों का मेंथा की फसल से मोह भंग हो रहा है। साल दर साल जनपद संभल में मेंथा की फसल का रकबा घटता जा रहा है। किसान मेंथा की फसल छोड़ कर मक्का पैदा कर रहे हैं। पिछले एक साल से मेंथा ऑयल 950 से 1000 रुपये के प्रति किलो के बीच ही घूम रहा है, जिससे किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही। जिला कृषि अधिकारी प्रबोध कुमार ने बताया कि साल दर साल मेंथा की फसल से किसानों का मोह भंग हो रहा है। किसान मक्का की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। मक्का में फायदा भी अधिक है। वहीं इस बार जनपद में 10-15 हेक्टेयर ही मेंथा की खेती हुई है।
-
कोट:
मेंथा कारोबार में लाखों किसान, मजदूर, युवा व व्यापारी लगे हैं। सरकार को इनकी समस्या पर विचार करना चाहिए। मेंथा की खेती को बढ़ावा देने के लिए कोई रास्ता निकालना चाहिए। पिछले दिनों चंदौसी और बदायूं से मेंथा एसोसिएशन के माध्यम से केंद्र व प्रदेश सरकार को पत्र भेजा गया था। काफी पैरवी की गई, लेकिन सिंथेटिक मेंथाॅल बंद नहीं हुआ।
भुवनेश वार्ष्णय, सदस्य, मिंट मैन्यूफेक्चरर एण्ड एक्सपोटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया।
-
कोट:
मेंथा कारोबार में सिंथेटिक मेंथाॅल की सेंध लग गई है। जिससे मंदी का दौर शुरू हो गया है। पिछले एक वर्ष से मेंथा का भाव भी एक ही जगह पर रुका हुआ है। सिंथेटिक मेंथाॅल की सप्लाई देश में बंद होनी चाहिए। इसके लिए कई बार केंद्र व प्रदेश सरकार को पत्र भेजा जा चुका है।
अंकुर अग्रवाल, सचिव, मेंथा एसोसिएशन चंदौसी।