शासन से फरमान आने के बाद लगतार तीसरे दिन भी मीट की दुकानें बंद रहीं। बेरोजगार हुए लोगों का कहना है कि अगर नगर पालिका परिषद ने माडर्न पशु वधशाला बनाई होती, तो मीट विक्रेताओं को यह दिन न देखना पड़ता। नगर पालिकाओं के पास माडर्न पशु वधशालाएं बनाने के लिए 2013 में ही आदेश आ गए थे, लेकिन जिले की किसी भी नगर पालिका परिषद ने इस आदेश का पालन नहीं किया, बल्कि अवैध स्लाटिंग को चोरी छुपे चलने दिया।
जिले में मीट की दुकानों पर ताले लटके रहे। अवैध बूचड़खाने बंद होने की वजह से मीट की दुकानें बंद हुई हैं। दुकानें बंद होने से दुकानदार और इन्हें मीट सप्लाई करने वाले लोग बेरोजगार हो गए हैं। लोगों में सरकार के फैसले पर आक्रोश है। संभल में मीट के कारोबार से कुरैशी बिरादरी के अधिकतर परिवार किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं।
इनकी ओर से सरकार के सामने समस्या उठाई गई है और संभल, सरायतरीन और सिरसी में मार्डन पशु वधशाला बनाए जाने की मांग की गई है। इस स्थिति के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि एनजीटी की ओर से जब जब रिपोर्ट मांगी गई। अधिकारियों ने नगर पालिका की रिपोर्ट पर यकीन करते हुए यही लिखा, हमारे यहां अवैध बूचड़खाने बंद हो गए हैं, जबकि हकीकत में बूचड़खाने चल रहे थे।
जब सरकार बदली और बीजेपी के संकल्प पत्र लागू हुए तो नौकरशाही से लेकर पुलिस महकमा तक चेत गया। अधिकारियों ने छापामारी करके अवैध बूचड़खानों को बंद कराया गया, जबकि पिछली सरकार में इन बूचड़खानों की तरफ कोई जाता नहीं था। अब मीट विक्रेताओं का कहना है कि माडर्न पशु वधशाला बनाने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। नगर पालिका अपनी जिम्मेदारी पूरी करती तो यह समस्या ही क्यों आती।