कैंसर के मरीजों का आधुनिक मशीनों से होगा इलाज
- फोटो : demo pic
खसरे का टीकाकरण सवालों के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग खसरे की रोकथाम के लिए पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रहा है। गांव में कहर बरपा रहा खसरे ने अब शहर में भी अपनी दस्तक दे दी है। जो जनजीवन के लिए खतरा बनता जा रहा है। नगर के मुंसिफ रोड स्थित एक परिवार खसरे की चपेट में है।
मुंसिफ रोड निवासी चालक अजीत सिंह का परिवार खसरे की चपेट में है। पत्नी एलिस (40), पुत्र हरगुन (15) व यूना (08) और बेटियां शीनू (16) व आस्था (06) खसरे की चपेट में हैं। परिवार में अजीत सिंह के अलावा सभी सदस्य बीमार हैं। इलाज के नाम पर परिवार अपने स्तर से जुटा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग खसरे से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की तरह ही कुछ खास करता नजर नहीं आ रहा है। यूं तो चंद कदमों की दूरी पर संयुक्त चिकित्सालय है। शहरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं की बदहाली पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा रही है।
स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी प्रपत्रों पर आंकड़े भरकर पूरी हो जाती है। ऐसे में जरूरतमंदों को उनके हक का कितना इलाज मिल पा रहा है, यह कहना बहुत मुश्किल है। शासन की कवायद और जनहित की योजनाओं को अधिकारी कर्मचारी पलीता लगा रहे हैं।
खसरा का संक्रमण तेजी से फैलता है। अजीत सिंह के घर के नजदीक घनी आबादी है। ऐसे में खसरे की रोकथाम के लिए उचित पहल नहीं की गई तो संक्रमण बढ़ सकता है। यदि संक्रमण हुआ तो कचहरी, स्टेट बैंक कालोनी, भगत सिंह कालोनी समेत नगर का पॉश कालोनी क्षेत्र चपेट में आ सकता है।
डा. उमराव सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा खसरा समेत सात जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण चल रहा है। टीकाकरण से जो बच्चे छूट गए हैं। विशेष अभियान चलाकर टीकाकरण किया जाएगा। खसरे की चपेट में आने के मामले की जानकारी आशा और एएनएम को होनी चाहिए। लापरवाही का मामला है। संबंधित आशाओं और एएनएम को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।