निर्यात घटने और टैक्स का बोझ पड़ने के साथ-साथ सिंथेटिक मैंथॉल की बढ़ती खपत से भारत की मैंथा इंडस्ट्री घाटे में डूबती जा रही है। सरकार की ओर से इंडस्ट्री को बचाने और कारोबारियों तथा किसानों को प्रोत्साहन देने की कोई पहल नहीं की गई। यूपी में तो छोटे मैंथा कारोबारियों पर मंडी टैक्स अलग से लाद दिया गया है।
दस करोड़ रुपये मशीनरी में निवेश करने वाले मैंथा कारोबारियों को मंडी टैक्स में छूट मिली हुई है जबकि छोटे कारोबारियों को 1.5 प्रतिशत मंडी टैक्स अदा करना पड़ता है। इसके साथ ही मैंथा पर पांच प्रतिशत वैट का बोझ है।
अंतर्राष्ट्रीय मंदी, सिंथेटिक मैंथॉल की बढ़ती खपत और टैक्स के बोझ से एक वर्ष में देश के मैंथॉल निर्यात को 800 करोड़ रुपये का झटका लग चुका है। तमाम निर्यातक और छोटे कारोबारियों के सामने प्रश्न यह है कि करें तो क्या करें।
दूसरे कारोबार का विकल्प तलाशते मैंथा व्यापारियों में तमाम ऐसे व्यापारी हैं जिन्होंने मैंथा के साथ-साथ अन्य कारोबार को खड़ा करने में ध्यान दिया है। यदि यही हाल रहा तो अन्य कारोबारी भी मैंथा इंडस्ट्री से पलायन कर जाएंगे।
मैंथा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल बाोले, मैं मैंथा का कारोबार पूरे मन से कर रहा था लेकिन सरकारी नीति और सिंथेटिक मैंथॉल ने मुझे तोड़ दिया है। अब कृषि और पशु पालन पर ध्यान दे रहा हूं। मैंने डेयरी खोली है। कृषि में नए प्रयोग करने का मन है। मैंथा का कारोबार भी है पर उतना नहीं है जितना पहले कभी था।
मैंथा कारोबारी परवेज अख्तर का कहना है मैंथा के कारोबार के साथ- साथ मैंने ईंट भट्ठा भी खोल लिया है क्योंकि जब से सिंथेटिक मैंथॉल मार्केट में आया है तब से प्राकृतिक मैंथॉल के कारोबार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस कारोबार का भविष्य बेहतर नहीं लगा जिसके चलते हमने दूसरे कारोबार की ओर हाथ बढ़ाया।
चंदौसी की मैंथा एसोसिएशन के सचिव अंकुर अग्रवाल ने मैंथा के कारोबार को बंद तो नहीं किया लेकिन दूसरे विकल्प पर काम शुरू कर दिया। इसके तहत रिटेल मार्केट में वह अपना भविष्य तलाश रहे हैं। शुरुआत फल-सब्जी और पतंजलि प्रोड्क्ट की आन लाइन बिक्री से कर रहे हैं। जल्दी ही एक एप के जरिए वह फल और सब्जी की बुकिंग करेंगे। सभी सामान और सब्जियों की घर बैठे डिलीवरी भी देंगे।
मैंथा व्यापारियों से जब बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि यूपी को छोड़कर मैंथा पर कहीं भी मंडी टैक्स नहीं है। व्यापारियों ने बताया कि अखिलेश यादव ने सरकार बनने से पहले मैंथा के कारोबार को मंडी टैक्स से मुक्त करने का भरोसा दिया था लेकिन सरकार बनी तो टैक्स को घटाकर आधा किया गया।
व्यापारियों के मुताबिक मंडी टैक्स दो प्रतिशत और आधा प्रतिशत विकास से है। जिसके चलते ढाई प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था लेकिन जब अखिलेश यादव की सरकार आई तो उन्होंने एक प्रतिशत मंडी टैक्स घटाया। इसके बाद अब 1.5 प्रतिशत टैक्स है। इसमें आधा प्रतिशत विकास से और एक प्रतिशत मंडी टैक्स है।