इसके अलावा इस्लाम में महिलाआें को अधिकार आदि मुद्दाें पर तकरीर की।
अंसारूल मुस्लेमीन कमेटी बिलारी की ओर से आयोजित कांफ्रेंस की शुरूआत मदरसे के छात्र ने तिलावते कलामे पाक से की। बाद में हाफिज जुबैर हस्सानी ने रसूल की शान में नात शरीफ पेश की। कांफ्रेंस के मुख्य वक्ता संभल से आए कारी अलाउद्दीन ने कहा कि जो लोग मजहबे इस्लाम और शरीयत से अंजान हैं वह टेलीविजन पर बैठकर तीन तलाक के मुद्दे पर बात न करें। उन्हाेंने कहा कि तलाक के मुद्दे पर शरीयत में विस्तार से खुलासा है, लिहाजा अन्य लोगाें को इस मुद्दे पर मजहबे इस्लाम में हस्तक्षेप से परहेज करना चाहिए। मौलाना मुबारक हुसैन मिस्बाही ने कहा कि मजहबे इस्लाम में महिलाआें को पर्याप्त सम्मान और अधिकार मिले हुए हैं।
कांफ्रेंस में अन्य उलमा ने कहा कि मुसलमान रोजा और नमाज की अहमियत को समझें। कुरआने पाक की हिदायताें पर चलने के साथ ही रसूल-ए-अकरम की सुन्नतों पर अमल करें। मुसलमान अपने बच्चाें को दीनी और दुनियावी तालीम दिलाकर हर तरह की बुराई से बचाकर रखें। महिलाआें को जरूरत के मुताबिक पर्दे में रहना चाहिए। कांफ्रेंस की सदारत शहर इमाम मौलाना सदाकत हुसैन, निजामत हाफिज शाकिर हुसैन ने की। इस दौरान मुफ्ती मुनव्वर अली कादरी, कारी गुलाम हैदर जीलानी, हाफिज शमशुल कमर, कारी रईस अशरफी, हाफिज मकबूल हुसैन, हाफिज इरशाद हुसैन आदि रहे।
कांफ्रेंस आयोजन में अंसारूल मुस्लेमीन कमेटी के तैयब अंसारी, गफ्फार अंसारी, शरीफ अंसारी, इश्तयाक असंारी, तस्लीम मदनी, जावेद अंसारी, अलाउद्दीन अंसारी, तहसीन अंसारी, मोहम्मद यामीन आदि का सहयोग रहा।