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गोवंश पशुओं में ही फैल रहा है लंपी रोग, बचाव की दी जानकारी

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गोवंश पशुओं में ही फैल रहा है लंपी रोग, बचाव की दी जानकारी
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संभल। ब्लॉक सभागार में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने लंपी रोग को लेकर ग्राम प्रधानों के साथ बैठक की है। बताया कि अन्य जिलों में गोवंशीय पशुओं में लंपी बीमारी फैल रही है। लंपी रोग का संक्रमण होने पर पशुओं के शरीर पर फोड़े जैसे चकत्ते बन जाते हैं। पशु खाना-पीना छोड़ देते हैं। तेज बुखार हो जाता है। सभी ग्राम प्रधान गांवों में पशु पालकों को इसकी जानकारी दें, जिससे पशु पालक जागरूक हों।
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बृहस्पतिवार को ब्लॉक सभागार में आयोजित बैठक में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने ग्राम प्रधानों से कहा कि सभी अपने-अपने गांवों के पशुपालकों को लंपी रोग के बारे में जागरूक करें। उन्होंने बताया कि अन्य जिलों में गोवंशीय पशुओं में यह बीमारी फैल रही है। इस बीमारी से पशुओं की मौत भी हो रही है। हालांकि गोवंश पशुओं के अलावा भैंसों में अभी यह संक्रमण नहीं फैला है। गायों को लंपी रोग से बचाने के लिए पशुओं को मच्छरों से बचाएं, पशुओं को 24 घंटे खुले में न बांधे, पशुशाला में व आसपास साफ-सफाई रखें। हफ्ते में दो बार ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने व बीमार पशु को अन्य पशुओं से अलग बांधे। जिससे यह बीमार अन्य पशुुओं में न फैले। साथ ही यह बीमारी किल्लियों, मक्खी, मच्छरों से दूसरे पशुुओं में फैल सकती है। किल्लियों से बचाव के लिए पशु को हर तीन महीने बाद किल्ली नाशक लिक्विड से नहलाना चाहिए। पशुुओं में तेज बुखार, नाक व आंखों से पानी निकलना, शरीर पर जगह-जगह फोड़े निकलने के बाद पस बन जाना आदि लंपी रोग के लक्षण हैं। बताया कि अगर पशु में तेज बुखार है तो पैरासिटामोल की टेबलेट या इंजेक्शन लगवाएं, जिससे बुखार को नियंत्रण किया जा सके।
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