चंदौसी(संभल)। आवास विकास कॉलोनी के पुष्प विहार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक कृष्णकांत शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्रदेव के अहंकार को समाप्त करने की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। गोवर्धन प्रसंग सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगाने लगे। इस दौरान श्रद्धालु श्रीकृष्ण भक्ति में लीन नजर आए।
कथा वाचक कृष्णकांत शास्त्री ने बताया कि गोकुल में जब इंद्रदेव की पूजा की तैयारी चल रही थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से इंद्र पूजा का कारण पूछा। गोकुलवासियों ने बताया कि इंद्रदेव वर्षा और वायु प्रदान करते हैं, जिससे खेती होती है और जीवन संभव है। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि पूजा उसी की होनी चाहिए, जो प्रत्यक्ष रूप से जीवन का आधार है।
उन्होंने गोकुलवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया। इस पर गोकुलवासियों ने इंद्रदेव की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने गोकुल पर मूसलाधार वर्षा और आंधी चला दी, जिससे चारों ओर हाहाकार मच गया। कथा वाचक ने बताया कि तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी गोकुलवासियों को उसके नीचे सुरक्षित स्थान प्रदान किया। यह देखकर इंद्रदेव का अहंकार टूट गया और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की।
इस अवसर पर प्रीति जैन, अजय कुमार जैन, संगीता अग्रवाल, रामकृष्ण अग्रवाल, कुमुदिनी शर्मा, हरीश कुमार शर्मा, अंशु शर्मा, अवनीश कुमार मिश्रा, मीना सक्सेना, उत्कर्ष गुप्ता, सच्चिदानंद शर्मा, अवनीश शर्मा, राजीव शर्मा, चंचल गोयल, अंकुर अग्रवाल, नंदिनी अग्रवाल आदि मौजूद रहे।