चंदौसी। दहेज हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने आरोपी पति, सास व ससुर को आजीवन कारावास और तीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोपियों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता को जला दिया था।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि वादी थाना असमोली क्षेत्र निवासी हसीना ने सात दिसंबर 2017 को थाना असमोली में दहेज के लिए उसकी बेटी को जलाने का मुकदमा दर्ज कराया था। रिपोर्ट में बताया था कि हसीना ने अपनी बेटी समीना का निकाह मार्च 2017 में थाना असमोली क्षेत्र के गांव तेलीपुरा निवासी मुस्लिम के साथ किया था। शादी के बाद से ही पति, सास, ससुर और देवर दहेज से खुश नहीं थे। कई बार मारपीट कर उसकी बेटी को घर से निकाल दिया था। तीन दिसंबर 2017 को उन्होंने अपनी बेटी को रजामंद करके ससुराल भेजा था।
सात दिसंबर 2017 को ससुराल पक्ष से फोन पर सूचना मिली थी कि समीना ने आग लगा ली है। उसकी मां ने अस्पताल पहुंचकर समीना से जानकारी की तो उसने ससुरालियों पर दहेज की मांग पूरी न होने पर जलाने का आरोप लगाया था। मजिस्ट्रेट ने भी पीड़िता के बयान दर्ज किए थे। बाद में उपचार के दौरान समीना की मौत हो गई थी। मृतका की मां हसीना ने पति मुस्लिम, ससुर मुस्तकीम, सास अकलीमा के खिलाफ दहेज की मांग पूरी न होने पर उसकी बेटी को जलाकर मारने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अपर सत्र न्यायालय रेप केसेज एंड पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश सुशील कुमार तृतीय ने मामले में सुनवाई, गवाहों के बयान व साक्ष्यों के आधार पर पति मुस्लिम, ससुर मुस्तकीम और सास अकलीमा को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और तीनों को दस -दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।