संभल। निलंबित लेखपाल और सेवानिृवत्त कानूनगो को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के मामले में लेखपाल संघ आंदोलन की राह पर चला पड़ा है। बृहस्पतिवार को लेखपाल संघ के पदाधिकारी कानूनगो व लेखपालों के साथ पुलिस अधीक्षक को संबोधित ज्ञापन देने के लिए पुलिस क्षेत्राधिकारी कार्यालय पहुंचे और धरना दिया। सीओ के न मिलने पर एसडीएम ने लेखपालों से ज्ञापन लिया। इसमें कार्रवाई को गलत बताया है।
लेखपाल संघ के अध्यक्ष सुशील यादव ने बताया कि संभल तहसील क्षेत्र के गांव लखनपुर में विरासत के मामले में पुलिस ने यह कार्रवाई की। जबकि इस मामले में सिर्फ भूलवश आदेश दर्ज हो गया था पर बाद में लेखपाल की आख्या के बाद ही नायब तहसीलदार भूड़ के न्यायालय से संशोधित आदेश हुआ और पुराने नाम को यथावत रखा गया। साथ ही, विक्रय की गई भूमि के नामांतरण को भी न्यायिक तहसीलदार द्वारा निरस्त किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने जांच में यह तथ्य बिल्कुल नहीं देखें। दोनों कर्मियों के खिलाफ जानबूझकर गलत कार्रवाई को आगे बढ़ाया। इसके सबके बाद धोखे से उप जिलाधिकारी से वार्ता कराने की बात कहकर दोनों कर्मियों को बुलाया और फिर वहां से गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई गलत है। इससे राजस्व विभाग की छवि धूमिल हुई है। इसकी क्षतिपूर्ति असंभव है। लेखपाल संघ ने इस कार्रवाई को अंजाम देने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने की मांग उठाई है। इस बाबत पुलिस अधीक्षक को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है। इस दौरान राजस्व निरीक्षक अवनेश कुमार, महेंद्र सिंह, सतीश यादव, चंद्रपाल सिंह व लेखपाल मनोज कुमार, ओमकार गौड़, सचिन कुमार, सुरेंद्र सिंह, पूनम रानी, अंशू त्यागी, अंजलि सिंह आदि रहे।