चंदौसी में जूता चप्पल बनाते कारीगर।
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जिस चमड़ा उद्योग से चंदौसी के कारोबारी चांदी काट सकते थे उसकी चमक फीकी पड़ गई है। आलम यह है कि इससे जुड़े लगभग छह हजार श्रमिकों के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ करना मुहाल हो गया है।
स्थानीय लोगों ने कई बार इसे विकसित करने की योजनाएं शासन और सरकार के पास भेजकर गुहार लगाई पर कमजोर राजनीतिक पैरवी के चलते नतीजा सिफर रहा।
यहां के कारोबारियों का कहना है कि अगर सरकार इस उद्योग पर ध्यान दे तो न सिर्फ इससे जुड़े लोगों के दिन बहुर सकते हैं, बल्कि पूरा क्षेत्र आर्थिक कामयाबी की नई इबारत लिख सकता है।