संभल। राष्ट्रवाद के सामने जातिवाद, क्षेत्रवाद, संप्रदायवाद आर्थिक विषमता तथा वैचारिक चुनौती प्रमुख खतरे के रूप में मौजूद हैं। राजनीतिक समूह व संगठन ने सबसे ज्यादा राष्ट्रीय एकीकरण के मार्ग में बाधा उत्पन्न की है। इसलिए हमें जर्मनी एवं इटली जैसे राष्ट्रों से सीख लेनी चाहिए कि किस प्रकार राष्ट्रीय एकीकरण के मुद्दे को प्रमुखता दी जाए।
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यह विचार एमजीएम महाविद्यालय में शनिवार को राष्ट्रीय एकीकरण के मार्ग में बाधाएं वैचारिकी और समाधान विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रो. योगेंद्र सिंह ने रखे। सेमिनार के पहले दिन आयोजक सचिव प्रोफेसर निरंकार सिंह ने राष्ट्रीय एकीकरण के मार्ग में बाधाएं विषय का परिचय कराया और कार्यक्रम की रूपरेखा पेश की।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर जगदीश कुमार पुंडीर ने बताया कि राष्ट्रीय एकीकरण के मार्ग में मोबाइल तकनीकी तथा इंटरनेट का दुरुपयोग भी बाधा के रूप में उत्पन्न हुआ है। मुख्य अतिथि तहसीलदार रवि सोनकर ने बताया कि राष्ट्रीय एकीकरण प्रशासन की सुदृढ़ता के लिए भी अति आवश्यक है। बिना राष्ट्रीय एकीकरण के सरकार की योजनाओं की पहुंच समाज के सभी वर्गों तक नहीं हो पाएगी। अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. योगेंद्र सिंह ने की।
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संचालन डॉ. संजय बाबू दुबे, डॉ. फहीम अहमद और डॉ. मोहम्मद अहमद ने किया। सेमिनार के तकनीकी सत्र में विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षकों और शोध छात्रों ने अपने 50 शोधपत्र प्रस्तुत किए।