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जिले में डीएपी और एनपीके की कमी, किसान सुबह से लगा रहे खरीदने के लिए लाइन

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जिले में डीएपी और एनपीके की कमी, किसान सुबह से लगा रहे खरीदने के लिए लाइन
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संभल। जिले में डीएपी और एनपीके की कमी है। इसकी खरीद के लिए किसान सुबह से शाम तक दुकानों पर लाइन लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा समस्या पवांसा, संभल और बहजोई ब्लॉक क्षेत्र में है। सुबह होते ही किसान इफ्को किसान केंद्र और सहकारी समितियों पर पहुंच जाते हैं। जो किसान पहले पहुंचते हैं उन्हें तो डीएपी और एनपीके (डाई) मिल जाती है। अन्य किसान वंचित रह जाते हैं।
शुक्रवार को भी पवांसा, हयातनगर और संभल में काफी किसान डाई की खरीद करने के लिए पहुंच गए। किसी को मिली और किसी को नहीं मिली। बड़ी संख्या में किसान ऐसे भी हैं जो एनपीके का स्टॉक कर रहे हैं। किसानों में चर्चा है कि आलू की फसल लगाने के लिए यह तैयारी की जा रही है। दरअसल इस समय जिले में धान, बाजरा, उड़द की फसले लगी हैं। आने वाले दिनों में आलू की बुआई की जाएगी। किसानों से जब इस बारे में जानकारी की गई तो बताया कि डीएपी 1350 और एनपीके के एक कट्टे का दाम 1470 रुपये है। इसकी सबसे ज्यादा जरूरत आलू की फसल में होती है। इसलिए किसान पहले से ही खरीद कर रख रहे हैं। जिससे आलू की बुआई के समय दिक्कत का सामना न करना पड़े। चर्चा यह भी है कि आने वाले दिनों में महंगाई और किल्लत न हो जाए इसलिए किसान खरीद करने में लगे हैं।
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अभी से किसान एनपीके का स्टॉक कर रहे हैं, इसलिए यह समस्या हो रही है। आलू की फसल के लिए एनपीके की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए किसान अभी से खरीद में लगे हुए हैं।
इंद्रपाल सिंह यादव, किसान, गांव सैंण्डा।
एनीपीके और डीएपी इस समय मिल नहीं रही है, जो किसान सुबह में केंद्रों पर पहुंच जाते हैं उन्हें मिल जाती है। अन्य किसान इंतेजार कर ही लौट रहे हैं। इसका समाधान किया जाना चाहिए।
सत्यवीर सिंह, किसान, गांव बंजरपुरी।
चार दिन इंतजार करने के बाद डीएपी के 20 कट्टे मिले हैं। अब आलू के दिनों में समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसलिए खरीदकर रख ली है। महंगी होने का भी अंदेशा है।
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रामचंद्र सिंह, किसान, गांव निबौरा।
धान की फसल में डीएपी और एनपीके की जरूरत नहीं है। किसान जो डीएपी और एनपीके की खरीद के लिए भीड़ लगा रहे हैं इसकी जानकारी नहीं है। आने वाले दिनों में आलू की फसल में इसकी जरूरत होगी।
देवराज सिंह, एडीओ कृषि, पवांसा।
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