Kul Devi appeared 700 years ago
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करीब 700 वर्ष पूर्व कुल देवी प्रकट हुई थीं, जिसके बाद यहां पूजा अर्चना शुरू की गई। अब यह मंदिर कैला देवी के नाम से विख्यात है। नवरात्र के समय भीड़ काफी बढ़ जाती है।
संभल की ग्राम पंचायत मुजाहिदपुर में स्थित कुल देवी का मंदिर अब कैलादेवी मंदिर के नाम से विख्यात हो चुका है। दूरदराज के श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं और उनके सभी मनोरथ पूरे होते हैं। इस मंदिर का इतिहास करीब 700 वर्ष पुराना है। जब आसपास तो क्या दूर तक कोई बस्ती भी नहीं हुआ करती थी। मां कैलादेवी प्रकट हुईं तो लोगों का आना जाना शुरू हुआ और पूजा अर्चना की जाने लगी। बताया जाता है कि उस समय गंगा कैलादेवी और अवंतिका मंदिर के निकट से होकर गुजरती थी। दोनों ही मंदिरों में चिराग जलता था। बाद में हरिबाबा का बांध बना तो गंगा का रुख भी बदल गया। मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि महाराज बताते हैं कि वर्ष-1950 में यहां परमपूज्य श्री श्री 1008 महंत रतनगिरि महाराज आए और उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया। जिसके बाद से यहां मान्यता बढ़ती चली गई। साल में एक दिन ऐसा आता है, जिस दिन विशेष पूजा अर्चना होती है। उस दिन भक्तों को इससे दूर रखा जाता है। कैलादेवी मंदिर पर हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास से मंदिर का जीर्णोद्धार तेजी से चल रहा है। कैलादेवी नाम से नया पुलिस थाना भी बना है और जिले की सबसे बड़ी गोशाला भी यहीं से संचालित होती है।
दिग्गज नेता मां के दरबार में आ चुके हैं दर्शन करने
कैलादेवी मंदिर की लोकप्रियता इससे स्पष्ट होती है कि जब कोई क्षेत्र में दिग्गज नेता आता है तो वह मां के दरबार में दर्शन करने के लिए जरूर जाता है। मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और अन्य दिग्गज नेता भी दर्शन करने के लिए आ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने जीर्णोद्धार कराने का वादा किया था और वह उसको पूरा भी कर रहे हैं।