संभल। मुहर्रम की पांच तारीख को सिरसी में जुलूस और मजलिसों का सिलसिला तेज हो गया है। घरों और इमामबाड़ों में भी मर्दों और औरतों की भी मजलिसें हो रही हैं। इन मजलिसों में खतीब पैगंबर-ए-इसलाम हजरत मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन समेत 72 शहीदों के वाक्यात बयान कर रहे हैं। इस दौरान जुलूसों में अंजुमनों ने नौहाख्वानी के साथ मातम भी किया।
रविवार को बाबर अली में मजलिस हुई। इसमें मर्सियां इब्ने हैदर व उनके हमनवा ने पढ़ी। मजलिस को मौलाना मुनव्वर रजा ने ख़िताब किया। इसके बाद अलम मुबारक का क़दीमी जुलूस अंजुमन हैदरी के तत्वाधान में निकाला गया। मकामी अंजुमनों ने नौहेख्वानी व सीनाजनी करते हुए जुलूस निकाला। जुलूस इमाम बारगाह शर्की में जाकर समाप्त किया। दूसरा तारीखी जुलूस मरहूम हाजी इफ़्तेख़ार हुसैन के अजाखाने से हजरत ओन और शबीहे जुलजना का जुलूस निकाला गया। इसमें अंजुमने जुल्फ़क़ारे हैदरी, गुलदस्ते हैदरी, हाशमी, अंजुमन हैदरी, गुलजारे हुसैनी, पंजेतनी, दिलदारे हुसैनी, करवाने हुसैनी, सफीने अजा आदि ने नौहा और मातम किया। मोहल्ला गरबी में भी अजादारी का सिलसिला लगातार जारी है। इइस दौरान मजलिसों के साथ अलम के जुलूस निकाले गए। यह मरकजी इमाम बारगाह में जाकर समाप्त हुआ। इसमें सेकड़ों की तादाद में अजादार एकत्र हुए। मोहल्ला शर्की में मोहम्मद जफर के अजाखाने में मजलिस हुई। इसमें मौलाना मुनव्वर रजा ने महफिल को खिताब किया। इसमें अंजुमन-ए- हाशमी ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। इसमें हजरत मुस्लिम के बच्चों के ताबूत निकाले गए। सराय सादक में मौलाना शाहबाद मेहंदी ने मजलिस को खिताब किया। इसमें हजरत अब्बास की बहादुरी पर प्रकाश डाला।