जफर अली एडवोकेट के अधिवक्ता आसिफ अख्तर द्वारा नियमित जमानत अर्जी में कहा गया कि संभल में हिंसा की घटना 24 नवंबर 2024 की सुबह नौ बजे की दिखाई जा रही है। जबकि अभियोजन कानून के अनुसार जामा मस्जिद सर्वे की कार्रवाई चल रही थी। तब ही 700-800 व्यक्तियों की भीड़ इकट्ठी हो गई और सर्वे को बाधित करने की कोशिश की। इस मामले में दर्ज एफआईआर में जफर अली एडवोकेट का कोई रोल नहीं दिखाया गया। जबकि उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया। उनके खिलाफ केवल ये आरोप है कि 25 नवंबर 2024 को उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस की थी तथा घटना में कुछ गलती प्रशासनिक अधिकारियों की भी बताई थी।
प्रेस कांफ्रेंस में कुछ बात कहना झूठे साक्ष्य बनाने की श्रेणी में नहीं आता है। जमानत अर्जी में यह भी कहा गया है कि प्रशासनिक अधिकारी जफर अली एडवोकेट पर बयान बदलने का दबाव बना रहे थे। जफर अली एडवोकेट को 24 मार्च 2025 को इंक्वायरी कमीशन के सामने बयान देने जाना था। इस कारण एक दिन पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जफर अली की आयु 70 वर्ष है तथा वह रेग्युलर प्रेक्टिशनर हैं और हृदय रोग से पीड़ित हैं।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि एक अंतरिम जमानत प्रार्थनापत्र भी जफर अली एडवोकेट के द्वारा न्यायालय में पेश किया गया। जिसको न्यायालय ने खारिज कर दिया और नियमित जमानत प्रार्थनापत्र पर केस डायरी न होने के कारण दो अप्रैल की तिथि निश्चित की गई है। इस दौरान पुलिस का कड़ा पहरा रहा।
जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद जाएंगे
अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र के खारिज होने के बाद सदर जफर अली एडवोकेट के अधिवक्ता मो. सगीर सैफी ने बताया कि उच्चतम न्यायालय दिल्ली के अधिवक्ताओं से भी इस संबंध में राय मशविरा किया जा रहा है। अधिवक्ता वर्तिका मणि की टीम बृहस्पतिवार को जिला न्यायालय में पहुंची है। जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद में भी जाया जाएगा।