संभल। असमोली थाना क्षेत्र के गांव निबौला निवासी ओमप्रकाश माथुर (46) की जान तेंदुए ने तो नहीं ली है। इसकी पुष्टि वन विभाग ने कर दी है। क्योंकि घटनास्थल के आसपास कोई पदचिन्ह ऐसा नहीं मिला है जिससे तेंदुए की मौजूदगी का अहसास हो सके। बुधवार को वन विभाग की छानबीन में सामने आया है कि जो पदचिन्ह पाए गए हैं वह डॉग फैमिली यानि कुत्ते या गीदड़ के हो सकते हैं। डीएफओ प्रीति यादव ने स्पष्ट कहा कि तेंदुए के पदचिन्ह कहीं नहीं मिले हैं। मृतक के जो फोटोग्राफ सामने आए हैं उससे भी यह जाहिर नहीं हो रहा है कि तेंदुए ने हमला किया है।अब सवाल उठता है कि ओमप्रकाश की जान कैसे गई। पुलिस ने जानलेवा हमला करने का मामला दर्ज तो किया है लेकिन उसको हत्या में तरमीम नहीं किया गया है। कहा जाए तो पुलिस इस मामले में उलझी हुई है।
एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जानवर के नाखून और दांत के निशान मिले हैं। पुलिस अब एक्सपर्ट की राय लेगी। जिससे हकीकत सामने आ सके। एसपी का कहना है कि पुलिस की छानबीन के दौरान ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि हत्या की गई है। हत्या के पीछे का मकसद भी नहीं है।
दरअसल शनिवार की शाम करीब साढ़े चार बजे ओमप्रकाश घर से बिना बताए निकले थे। उनके बेटे कृष्णा माथुर ने यह जानकारी पुलिस को दी है। जब वह घर नहीं लौटे तो तलाश की गई। देरशाम ओमप्रकाश सैदपुर इम्मा से भवालपुर मार्ग के किनारे एक दूरसंचार कंपनी के टावर के पास घायलावस्था में पड़े मिले थे। पुलिस ने जिला अस्पताल भर्ती कराया जहां मौत हो गई थी। पुलिस ने माना कि तेंदुए के हमले में जान गई है। इसके बाद ही वन विभाग को छानबीन के लिए कहा गया। वन विभाग की टीम ने तेंदुए की मौजूदगी से इनकार कर दिया है। अब सवाल उठ खड़ा हो गया है कि फिर जान गई कैसे। पुलिस भी इसी सवाल में उलझ गई है। जबकि ओमप्रकाश का शरीर पूरी तरह जख्मी था और जब वह मिले तो यह भी बताने की स्थिति में नहीं थे कि उनकी यह हालत कैसे हुई। एसपी का कहना है कि वह शराब के ठेके पर दो अन्य लोगों के साथ गए थे। लौटते समय वह रास्ते में रूक गए और जब बेटा तलाश करता हुआ पहुंचा तो घायल मिले थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार भी जानवर का ही हमला सामने आया है। वहीं, दूसरी ओर पीड़ित परिवार को मौत का सच सामने आने का इंतजार है।