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बंद मीरमपुर भूमि प्रकरण में जांच पूरी, तत्कालीन लेखपाल और कानूनगो फंसे

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तहसील क्षेत्र के गांव बंद मीरमपुर भूमि प्रकरण मामले में प्रथम दृष्टया तत्कालीन लेखपाल, रजिस्ट्रार कानूनगो और कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध है। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में उनको दोषी माना गया है। जांच रिपोर्ट राजस्व परिषद को प्रेषित कर भूलेख पोर्टल से खतौनी हटाने की संस्तुति की गई है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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संभल जिले की तहसील गुन्नौर के गांव बंद मीरमपुर में 145 हेक्टेअर (2345 बीघा) सरकारी भूमि है। तहसील कर्मचारियों ने वर्ष 2012 में बिना किसी आदेश के ऑनलाइन खतौनी फीड करते समय भूमि की श्रेणी 10(ग) एनजेडए (नॉन जमींदारी एबोलिशन) से बदलकर श्रेेणी 1(क) जेडए (जमींदारी एबोलिशन) में कर दिया और 170 किसानों को मालिक बना दिया था। जुलाई में तहसीलदार गुन्नौर देवेंद्र मणि त्रिपाठी की जांच में पूरा मामला पकड़ में आया था। तहसीलदार की संस्तुति पर एसडीएम गुन्नौर ने मामले में जांच टीम गठित कर दी थी।
सोमवार को तहसीलदार ने बताया कि बिना किसी आदेश के तत्कालीन लेखपाल ने वर्ष 2005 में सिंचाई विभाग की 2345 बीघा की श्रेणी बदलकर जेडए में दर्ज कर दी। इसके बाद वर्ष 2012 में तत्कालीन रजिस्ट्रार कानूनगो और कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से सिंचाई विभाग की आसामी पट्टे पर आवंटित भूमि की खतौनी कंप्यूटराइज्ड करा दी। फिलहाल जांच रिपोर्ट राजस्व परिषद को प्रेषित कर उक्त खतौनी को भूलेख पोर्टल से हटाने की संस्तुति की गई है।
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ढाई करोड़ रुपये से अधिक की भूमि
सिंचाई विभाग की 145 हेक्टेयर भूमि की कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये आंकी गई है। बहुत से किसान इस भूमि को बेच चुके हैं। इसके अलावा इस भूमि पर किसानों ने केसीसी भी बनवा लिया है। इन सब की भी जानकारी अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
भूलेख पोर्टल से दर्ज खतौनी को हटाने के लिए रिपोर्ट राजस्व परिषद को प्रस्तुत की गई है। जिन राजस्व कर्मियों की संलिप्ता पूरे प्रकरण में है। उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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रामकेश धामा, एसडीएम गुन्नौर
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