पावर हाउस की जमीन पर लगीं दुकानें।
- फोटो : अमर उजाला
बिजली घर की जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। सड़क के दोनों ओर दुकानें लगा रखी है। एक विद्युत कर्मी इन दुकानदारों से प्रतिमाह अवैध वसूली कर रहा है जबकि विभाग के आला अधिकारी इससे अनभिज्ञ बने हुए है।
करीब 40 साल पहले शहर में रेलवे लाइन किनारे तापीय विद्युत घर था। करीब 30 बीघे में बना पावर हाउस किन्ही कारणों से बंद हो गया। इसके बाद पावर हाउस के सारे कल पुर्जे व सामान विभाग ने नीलाम कर दिया। पावर हाउस बंद होने से सारी जमीन खाली हो गई। तब से आज तक इस जमीन का कोई उपयोग नहीं हो सक। लेकिन अब पावर हाउस की जमीन पर लोगाें ने अतिक्रमण करना जरूर शुरु कर दिया है। अतिक्रमण भी विभाग के लोग ही करा रहे हैं। लोगों ने पावर हाउस से जा रहे खड़ंजे के दोनों ओर दुकानें लगा रखी है। सैकड़ाें की तादाद में दुकानें लगाकर लोगाें ने पावर हाउस की जमीन पर कब्जा कर लिया है। पावर हाउस जानवरों का चरागाह बन गया है।
मशीनें उखाडे़ जाने से गहरे गड्ढे हो गए हैं।जो अब तालाब का रुप ले चुके हैं। जानवर इन तालाब में दिन भर पडे़ रहते है। जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं। शासन को इस बारे में अवगत नहीं कराया गया है। यदि शासन इस ओर ध्यान दे तो इस जमीन का सदुपयोग किसी अच्छे कल कारखाने के लिए किया जा सकता है।