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इलाज को नहीं पैसे, दो की मौत, चंदे से अंतिम संस्कार

Sun, 04 Dec 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
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हद तो तब हो गई जब महिला का अंतिम संस्कार करने के लिए गांव के लोगों को चंदा करना पड़ा।
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हयातनगर थाना क्षेत्र के गांव रसूलपुरधतरा निवासी मलखान की पत्नी रेनवती (48) 30 नवंबर को अचानक पेट में दर्द हो गया। तबीयत खराब होने के बाद बेटा रणवीर सिंह मां को उपचार के लिए संभल के सरकारी अस्पताल में लेकर पहुंचा। डाक्टरों ने गंभीर हालत को देखते हुए उसका उपचार किसी बड़े अस्पताल में कराने सलाह दी लेकिन रुपये नहीं थे। रिश्तेदारों से रुपये उधार में लिए इलाज शुरू कराया।

इस बीच भाई को संतोष को बैंक की कतार में लगाया पर कैश नहीं निकल सका। निजी अस्पताल में जैसे-तैसे इलाज कराया। इस बीच मां की हालत बिगड़ गई तो रणवीर सिंह अपनी मां को लेकर अलीगढ़ के सरकारी मेडिकल कालेज गए। मेडिकल कालेज में 2 दिसंबर को भर्ती कराया। तीन चार घंटे में कई सारे टेस्ट कराए। दवाएं बाहर से मंगाईं गईं। इस दौरान कैश न होने से समस्या आई।
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यहां भी रिश्तेदारों ने पैसे जुटाए और दवाईं की। लेकिन रेनवती को बचाया जा न सका। रेनवती के बेटे रणवीर ने बताया कि शुक्रवार को रात्रि में नौ बजे उनकी मां ने दम तोड़ दिया। देर रात्रि वह मां को लेकर गांव आए। अंतिम संस्कार तक के लिए रुपये नहीं थे। इसके बाद गांव वालों ने चंदा किया। अंतिम संस्कार किया गया।

पति पैसों को जूझता रहा, पत्नी कह गई अलविदा
नगदी नहीं मिल पाने के कारण कस्बा नरौली की एक महिला की अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि महिला की तबीयत खबरा हुई थी। लेकिन वह नगदी का इंतजाम नहीं कर सके। ऐसे में महिला की मौत हो गई। 
कस्बा नरौली निवासी महेश चंद्र गांव-गांव फेरी लगाकर कपड़ा बेचता है। उसकी पत्नी ज्योति (25) को गुरुवार को पेट में दर्द हुआ तो महेश पत्नी को इलाज के लिए हल्द्वानी उत्तराखंड ले गया।

उपचार से कोई लाभ न होने पर महेश अपनी पत्नी ज्योति को शुक्रवार को बरेली ले आया। बरेली में उसने पत्नी को एक मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। रात में चिकित्सकों ने महेश से पत्नी का आपरेशन करने की बात कही। आपरेशन से पहले अस्पताल में 35 हजार रुपये जमा करने को कहा। महेश ने चिकित्सकों से घर जाकर रुपये लाने को कहा। शनिवार की सुबह वह नरौली के लिए निकला। अपराह्न दो बजे नरौली पहुंचा। सिडिकेट बैंक से रुपये निकालने पहुंचा तो बाहर करेंसी न होने का बोर्ड लगा देखकर मायूस हो गया। इसी दौरान उसे पत्नी की मौत की सूचना मिल गई। नगदी के अभाव में समय से इलाज न मिलने के कारण ज्योति की मौत से महेश परेशान हो उठा। घर में भी कोहराम मच गया।

राहत - नहीं ब्लॉक होंगे जनधन खाते, निकासी की मियाद बांधी 
आरबीआई की नई गाइडलाइन ने जनधन खाता धारकों को बड़ी राहत दी है। आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई जनधन खाता ब्लॉक नहीं होगा। लेकिन सभी की मियाद बांध दी गई है। इस गाइड लाइन के बाद जिले के उन 11 हजार जनधन खाता धारकों को राहत मिली है जिनके खाते अचानक पैसे आने की वजह से ब्लॉक कर दिए गए थे। 

जिले में सभी बैंक शाखाओं में जनधन योजना के कुल 391109 खाते हैं। हालांकि इन सभी जनधन खातों में कुल कितनी रकम अब तक जमा हो सकी है, इसकी जानकारी तो तीन चार दिन के बाद ही हो पाएगी लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की स्पष्ट गाइड लाइंस जरूर जारी कर दी गई है। लीड बैंक अधिकारी सतीश कुमार गुप्ता ने बताया कि नई गाइड लाइन के बाद सभी जनधन खाते पूर्ववत सामान्य हो गए हैं। अब ना कोई जनधन योजना का खाता ब्लाक किया जाएगा और ना ही किसी खाते के लेनदेन पर प्रतिबंध होगा लेकिन कुछ शर्ते जरूर लगाई गई है। अभी तक कोई अन्य प्रतिबंध या शर्त जनधन बैंक खातों पर नहीं थी।
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लेकिन जनधन खातों में अचानक आई राशि के बाद इन पर कार्रवाई करते हुए ब्लॉक कर दिया गया था। संभल के करीब 11 हजार जनधन खातों को ब्लॉक  कर दिया गया था। इनमें किसी तरह की कोई लेनदेन नहीं हो रहा था।

 
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