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भगवान कल्कि की जन्मतिथि पर आपत्ति है तो करंे शास्त्रार्थ : रामभद्राचार्य

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संभल। भगवान कल्कि की जन्मतिथि पर उठ रहीं आपत्तियों के बावजूद तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य बैसाख मास में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को अभिजीत मुहूर्त में भगवान कल्कि अवतरित होंगे, इस पर कायम हैं। उन्होंने अंतिम दिन कथा के मंच से चुनौती दी कि यदि किसी की मां ने दूध पिलाया है तो वह उनसे चर्चा करें, शास्त्रार्थ करें, वह तैयार हैं। क्योंकि यह बात शास्त्र सम्मत ही उन्होंने कही है।
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बताया कि खुद वेदव्यास जी ने यह तिथि बताई है और हमने प्रमाण दिए हैं। यदि इसके बाद भी विवाद करना है तो करो। नसीहत देेते हुए कहा शास्त्र नहीं मानोगे तो अस्तित्व ही कहां रह जाएगा। चुटकी ली और बोले कि हाथी फिरे बाजार, कुत्ते भौंके हजार, उन्हें क्या फर्क पड़ता है। बोले कि कल्कि धाम मंदिर का जब निर्माण पूरा हो जाएगा तो वह कल्कि पुराण को शुद्ध रूप में प्रस्तुत करेंगे, क्योंकि इसमें भी कई कमियां रह गई हैं। क्योंकि इसके संपादन में अनुवादक ने मलिक मोहम्मद जायसी का उल्लेख किया है, जो गलत है। क्योंकि यह 15वीं शताब्दी की है और कल्कि भगवान के अवतार की रचना 5000 वर्ष पूर्व हुई है। इसलिए इसका इससे कोई लेना देना नहीं है। संवाद
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