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मैं न बिकता हूं और न झुकता हूं, कुछ ताकतें मेरी आवाज को दबाना चाहती हैं : बर्क

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संभल। संभल बवाल में मुख्य साजिशकर्ताओं के तौर पर आरोपी बनाए गए संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने चार्जशीट दाखिल होने के चार दिन बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। सांसद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा है कि कुछ ताकतें मेरी आवाज को दबाना चाहती हैं। मैं न बिकता हूं और न झुकता हूं, मैं आवाज उठाता रहूंगा। कानून के दायरे में लड़ाई लड़ता रहूंगा। मेरे दादा ने अवाम की खिदमत की थी और मैं भी करता रहूंगा। यह मुश्किलें तो आती रहेंगी।
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सांसद ने लिखा है कि अल्लाह जिसे चाहे इज्जत देता है और जिसे चाहे जिल्लत देता है। सांसद ने शायराना अंदाज में लिखा है कि मैं न घबराया कभी दारो रसन से, के हर गम को हंस कर पी लिया मैंने। आगे लिखा है कि जनता की आवाज को कोई नहीं रोक सकता लेकिन मैं फख्र से कह सकता हूं अपने लोगों के साथ हुए जुल्म में उनके साथ खड़ा रहा। इंशाअल्लाह आगे भी साथ रहूंगा।
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सांसद पर है भीड़ एकत्र कराने का आरोप, मुकदमे में बनाया गया है मुख्य आरोपी
जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में दर्ज एक एफआईआर में सांसद व जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट की भूमिका मुख्य रूप से उल्लेख की गई है। जामा मस्जिद में इलेक्ट्रीशियन के तौर पर काम करने वाला रिजवान को माध्यम बनाया गया था। पुलिस ने चार्जशीट में उल्लेख किया है कि सांसद को जामा मस्जिद कमेटी के सदर ने फोन पर 23 नवंबर की रात को सर्वे होने की सूचना दी थी। इसके बाद सांसद ने रिजवान को भीड़ एकत्र करने के लिए कहा था। इसके बाद ही रिजवान ने सरायतरीन और जामा मस्जिद के आसपास के लोगों को एकत्र किया था। ताकि सर्वे को रोका जा सके। यह सभी उल्लेख पुलिस ने चार्जशीट में किए हैं। इसके चलते ही सांसद और जामा मस्जिद कमेटी के सदर को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
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एसपी ने कहा था-राजनीतिक व आपराधिक वर्चस्व के लिए कराया गया था बवाल

बवाल में 12 मुकदमे दर्ज किए गए हैं लेकिन सबसे अहम मुकदमा वह है जिसमें सांसद व जामा मस्जिद कमेटी के सदर को आरोपी बनाया गया है। क्योंकि इस चार्जशीट में लिखा है कि 24 नवंबर को राजनीतिक व आपराधिक वर्चस्व के लिए यह बवाल कराया गया था। राजनीतिक लाभ सांसद लेना चाहते थे और आपराधिक वर्चस्व शारिक साटा और उसका गिरोह लेना चाहता था। एसपी ने बताया कि राजनीतिक व आपराधिक वर्चस्व के चलते ही बवाल हुआ। इसके प्रमाण भी एसआईटी को मिले हैं।

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छह महीने बाद सांसद के घर का बिजली कनेक्शन जुड़ा
बवाल के बाद से सांसद की मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं। पहले बिजली चोरी के आरोप में 1.91 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। एफआईआर दर्ज होने के साथ ही कनेक्शन काट दिया गया था। सांसद हाईकोर्ट पहुंचे तो उन्हें राहत मिली। छह महीने बाद आपूर्ति बहाल हुई है। हालांकि सांसद को छह लाख रुपये जमा करने पड़े हैं। साथ ही महीने में तय समय पर बिजली का बिल अदा करने की शर्त लगी है। आवास में हुए निर्माण मामले में सुनवाई चल रही है। जिसमें निर्णय होना बाकी है।
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