अब से पहले सरायतरीन में चश्मे बनाने का काम नहीं होता था। विदेशों से चश्मों के मिले आर्डर को देखते हुए निर्यातक ने चश्मे बनाने का फैसला किया है। अभी तक यहां से केवल चश्मों के फ्रेम ही तैयार होकर विदेशों में भेजे जा रहे थे।
सरायतरीन के हैडीं क्राफ्ट प्रोड्क्टस विदेशों में प्रसिद्ध है। यहां बने हड्डी सींग के आभूषण विदेशियों को काफी लुभाते आ रहे हैं। हड्डी सींग से कानों के बुंदे, कमर की पेटी, अंगूठी, नेकलेस कड़े चूड़ियां, फोटो फ्रेम तथा घरेलू साज सज्जा का सामान बनाकर विदेशी बाजार में पहुंचाया जा रहा है। इन सामानों को रूस, अमेरिका, यूरोप, कोरिया, जापान, आस्ट्र्ेलिया, चीन, समेत विभिन्न देशों में भेजा जाता है, लेकिन अब विदेशों से सरायतरीन में बनने वाले चश्मों की मांग भी तेजी के साथ उठ रही है।
विदेशियों को सींग से तैयार चश्मे काफी लुभा रहे हैं। अब तक केवल सरायतरीन के ज्यादातर घरों में चश्मे बनाने के लिए सींग से पट्टी निकाली जाती थी उसके बाद उन्हें प्रेस करके सीधा किया जाता था। पट्टियों को विदेशों से आ रही डिमांड़ के अनुसार भारी मात्रा में भेजा जाता था, लेकिन अब सरायतरीन के नियार्तक आर्ट इंडिया कंपनी के मालिक मोहम्मद अहमद ने बताया कि पट्टियों को बाहर भेजने के साथ-साथ सरायतरीन में भी पट्टियों से खूबसूरत फ्रेम बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। यही चश्मे विदेशों में बढ़ी-बढ़ी मशीनों से बनाए जाते थे, निर्यातकों की मेहनत रंग लाई तो सरायतरीन में ही चश्मे बनाने का कारोबार शुरू कर दिया गया। निर्यातक मोहम्मद अहमद ने बताया कि चश्मे की शुरूआत होने के बाद एक नई उम्मीद जगी है।
निर्यातकों को फिलहाल में चीन, ताइवान, कोरिया, जापान, जर्मनी, यूूरोप के कई देशों से चश्मे के आर्डर मिल चुके हैं। चश्मों को भारी मात्रा में तैयार कर विदेश के बाजार मेेें पहुंचाया जा रहा है। कारीगर मो. अतीक का कहना है कि विदेशी युवक के चेहरों की हमारे हाथ से बने सींग के चश्मे चमक बढ़ाएंगे। चश्मों की शुरूआत के बाद नये कारीगरों को हुनूर सीखने का अवसर मिलेगा।