संभल। यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) द्वारा औद्योगिक गलियारे में प्लॉट आवंटन प्रक्रिया के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। अभी तक 12500 स्क्वायर मीटर से कम प्लॉट के आवेदन नहीं लिए जा रहे थे। अब 1000 स्क्वायर मीटर जमीन के लिए भी आवेदन लिए जाने लगे हैं। संभल के मेंथा कारोबारियों ने 35 आवेदन किए हैं। जबकि हस्तशिल्प उत्पाद कारोबारियों ने 12 आवेदन कर दिए हैं। अभी जिले से आवेदन काफी होने की उम्मीद है। जिले के कारोबारियों की उम्मीद जगी है कि अब उनको भी 1000 स्क्वायर मीटर का प्लॉट मिल सकता है। हालांकि अभी इस पर निर्णय यूपीडा द्वारा ही लिया जाना है। अगर इन कारोबारियों को प्लॉट आवंटित हो जाते हैं तो जिले के कारोबारियों के लिए बड़ी राहत होगी।
संभल के गांव खिरनी में गंगा एक्सप्रेसवे किनारे यूपीडा द्वारा औद्योगिक गलियारा विकसित किया जा रहा है। आवेदन मांगे गए तो जिले के छह कारोबारियों ने 12500 स्क्वायर मीटर प्लॉट की बुकिंग कर दी। इस प्लॉट के लिए प्रति स्क्वायर मीटर 4640 रुपये तय किया गया है। कुल प्लॉट के लिए 5.80 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। अन्य खर्च को लगाकर छह करोड़ रुपये दिए जाने हैं। इसमें 99 वर्ष की लीज पर प्लॉट आवंटित कर दिया जाएगा। यूपीडा ने इन कारोबारियों को इस प्लॉट की धनराशि पांच वर्ष के दौरान देने के लिए राहत दी है। दस किस्तों में यह धनराशि अदा करनी है। बुकिंग करते समय पहली किस्त जमा कराई जा रही है।
आईआईए के मंडलीय सचिव कमल कौशल वार्ष्णेय का कहना है कि जिले में छोटे कारोबारियों की संख्या ज्यादा है। इसलिए मांग की थी कि छोटे प्लॉट भी आवंटित किए जाएं। इसको देखते हुए यूपीडा ने आवेदन मांगे हैं लेकिन इन प्लॉट को पाने के लिए क्या शर्तें रहेंगी। इस पर कोई विचार नहीं किया गया है। हमें उम्मीद है कि छोटे कारोबार के लिए भी प्लॉट आवंटित कर दिए जाएंगे।
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240 हेक्टेयर भूमि में बनेगा औद्योगिक गलियारा
गंगा एक्सप्रेसवे किनारे गांव खिरनी मोहिउद्दीनपुर, बसला, सारंगपुर और अमावती कुतुबपुर में करीब 240 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित होना है। इसमें प्लॉट आवंटित प्रक्रिया जारी है। उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले दो साल में इंडस्ट्रीज लगनी शुरू हो जाएंगी। इससे जिले में रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे।
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मेंथा और हस्तशिल्प कारोबारियों को मिलेगी बड़ी राहत
संभल की पहचान हड्डी-सींग के हस्तशिल्प उत्पाद और मेंथा कारोबार से होती है। यह दोनों ही कारोबार छोटी और बड़ी इंडस्ट्रीज के रूप में हैं। अब फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज भी बढ़ रही है। आलू का बड़ा कारोबार संभल से होता है। मेंथा फैक्टरी और हस्तशिल्प कारखाने संकरी गलियों में चलते हैं। प्रशासन ने शहर से बाहर संचालन के लिए आदेश भी कर दिए हैं। ऐसे में इन कारोबारियों को औद्योगिक गलियारे में प्लॉट मिल जाएगा तो कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
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टाटा पावर का भी लग सकता है औद्योगिक गलियारे में प्लांट
औद्योगिक गलियारे में टाटा पावर का भी प्लांट लग सकता है। कंपनी के बड़े अधिकारी औद्योगिक गलियारे की जमीन को देखकर गए हैं। सूत्रों का कहना है कि टाटा पावर सौर ऊर्जा या ईवी का प्लांट लगा सकती है। हालांकि अभी प्लाॅट के लिए आवेदन नहीं किया गया है। यदि टाटा पावर का प्लांट लगता है तो जिले में रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे।
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हमने मांग की है कि औद्योगिक गलियारे में हस्तशिल्प, मेंथा और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज के लिए अलग-अलग पार्क बना दिए जाएं। इससे यह कारोबार एक ही स्थान पर चलते रहेंगे। इससे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
कमल कौशल वार्ष्णेय, मंडलीय सचिव, आईआईए