चंदौसी। गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें बलिदान दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता संघ के प्रांत प्रचारक आनंद ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर प्रकाश डाला। उनके बलिदान को याद करते हुए बताया कि उन्हें हिंद की चादर कहा जाता है। पूरे विश्व में एक परिवार ही ऐसा है, देश और धर्म की रक्षा के लिए जिसकी तीन पीढ़ियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।
कहा कि सर्वप्रथम श्री गुरु तेग बहादुर जी को चांदनी चौक में औरंगजेब के आदेश पर जल्लाद जलालुद्दीन ने उनका सिर धड़ से अलग कर उन्हें शहीद कर दिया। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए औरंगजेब के सामने घुटने नहीं टेके और उन्होंने उनकी कोई शर्त नहीं मानी और मौत को स्वीकार किया। चमकौर के युद्ध में औरंगजेब से युद्ध में बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार ने शहीदी प्राप्त की।
गुरु गोविंद सिंह के दोनों छोटे साहिबजादों को वजीर खान ने पकड़ लिया गया। उनसे इस्लाम धर्म अपनाने को कहा गया तो उनका जवाब सुनकर पूरी सभा अचंभित रह गई। उन्होंने कहा कि हम अपने दादा का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। इस पर वजीर खान ने बौखला कर उन्हें दीवार में चुनवाने का आदेश दिया। इस तरह तीन पीढ़ियां बलिदान हो गईं।
कार्यक्रम में सरदार गोपाल सिंह, चरन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, मनदीप सिंह, जसवंत सिंह, हरविंदर सिंह, हरचरण सिंह, अमृतपाल सिंह, सरदार जसपाल सिंह, सुधीर मल्होत्रा, सचिन मग्गो, शिवराम अरोड़ा आदि उपस्थित रहे। संचालन सचिव गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा चरण सिंह एवं नगर कार्यवाह उदय तिवारी ने संयुक्त रूप से किया l