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Sambhal News: डीडीसी की तैनाती न होने से वादों में सुनवाई रुकी, मिल रहीं सिर्फ तारीख

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संभल। उप संचालक चकबंदी (डीडीसी) सुरेश चंद्र जायसवाल 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए तो अब तक इस पद अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी है। डीडीसी के न्यायालय में 811 मामले लंबित हैं और सुनवाई नहीं हो पा रही है। वहीं बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (एसओसी) मातवर सिंह का स्थानांतरण उन्नाव होने के बाद से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एसडीएम न्यायिक को चार्ज मिला है लेकिन उनके न्यायालय में भी करीब 200 मामले लंबित हैं और वादकारियों एवं किसानों को तारीख ही मिल रही है। न्याय की उम्मीद लगाने वाले वादकारियों के साथ-साथ अधिवक्ता भी परेशान हैं। अधिवक्ताओं ने इन दोनों पदों पर अधिकारियों की तैनाती किए जाने की मांग की है।
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संभल में डीडीसी और एसओसी न्यायालय में 1000 से अधिक मामले लंबित चल रहे हैं। डीडीसी की कुर्सी खाली पड़ी हैं और एसओसी का चार्ज एसडीएम न्यायिक को मिला है। किसान और वादकारी न्यायालय आते हैं और तारीख लेकर चले जाते हैं। दूरदराज से आने वाले किसानों को न्याय के बजाए सिर्फ तारीख मिल रही है। अधिवक्ताओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
संभल बार एसोसिएशन संभल के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि 31 जुलाई को डीडीसी सेवानिवृत्त हुए। उससे 15 दिन पहले चकबंदी आयुक्त को पत्र लिखा था और व्यवस्था पहले से ही करने की मांग की गई थी। वर्तमान में डीडीसी के न्यायालय में 811 मामले लंबित हैं। फिर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। 15-15 दिन के अंतराल में तीन पत्र भेजे जा चुके हैं। दूसरी तरफ एसओसी का ट्रांसफर होने पर पत्र भेजे गए लेकिन किसी की तैनाती नहीं की गई। चकबंदी का कार्य ठप पड़ा है। चार-पांच गांव चकबंदी में आए हैं तो चकबंदी प्रक्रिया बाधित हो रही है।
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हालांकि एसओसी चकबंदी का चार्ज एसडीएम न्यायिक को सौंपा गया है लेकिन उनका खुद कहना है कि उन्हें चकबंदी के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है। अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि जिलाधिकारी से मांग है कि डीडीसी की जब तक तैनाती न हो, तब तक एडीएम को चार्ज दिया जाए। डीडीसी और एसओसी की तैनाती के लिए पत्राचार किया जाए, जिससे समस्या का समाधान हो सके।
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यह मामले चल रहे लंबित
डीडीसी न्यायालय में चक निगरानी, मेरिट के मामले, संदर्भ के मामले लंबित चल रहे हैं। वहीं एसओसी न्यायालय में चक, चक की अपील, संदर्भ आदि के मामले हैं। इन मामलों में तारीख लगाई जा रही हैं।
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वर्जन-
उप संचालक चकबंदी की सीट खाली पड़ी है और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी का चार्ज एसडीएम न्यायिक को मिला है, वह भी नहीं देख पा रहे हैं। पूरे जिले का काम ठप पड़ा है। सुनवाई नहीं हो रही है। जल्द ही कोई व्यवस्था की जाए।
-सत्यवीर शर्मा, एडवोकेट
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वर्जन-
.डीडीसी 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए थे। जब से कोई किसी अफसर की तैनाती नहीं हुई है। लगभग 1000 मामले पेंडिंग हैं। इसके कारण किसानों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या का समाधान होना चाहिए।
-मुस्तकीम अहमद एडवोकेट
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.जब से डीडीसी सेवानिवृत्त हुए और एसओसी का ट्रांसफर हुआ है, तब से चकबंदी में समस्याएं हैं। किसान, वादकारी आकर तारीख लेकर चले जाते हैं। चकबंदी न्यायालयों का काम बाधित रहने से अधिवक्ता भी परेशान हैं।
-डॉ. अमित कुमार उठवाल, एडवोकेट
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डीडीसी के सेवानिवृत्त होने से पहले ही चकबंदी आयुक्त को पत्र लिखा था। उसके बाद भी तीन पत्र 15-15 दिन के अंतराल में भेजे गए। एसओसी का तबादला हो गया। किसी की तैनाती नहीं की गई। नए गांवों में चकबंदी प्रक्रिया बाधित है।
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-प्रदीप कुमार गुप्ता एडवोकेट
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