संभल। पूरे देश में प्रकृति और त्याग का पर्व हरियाली हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, पर संभल के मोहल्ला हल्लूसराय में शोक मनाया गया। घरों में चूल्हे नहीं जले। महिलाओं ने सोलह श्रृंगार भी नहीं किया। इसके पीछे का कारण मोहल्ले की बुजुर्ग महिलाएं बताती हैं कि यह हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान और कन्नौज के राजा जयचंद से जुड़ा मामला है।
प्राचीन और पौराणिक शहर संभल के मोहल्ला हल्लूसराय में ठाकुर परिवारों का बाहुल्य है, यह परिवार हरियाली तीज पर शोक मनाते हैं। परिवारों के बुजुर्ग बताते हैं कि पृथ्वीराज चौहान व कन्नौज के राजा जयचंद के बीच जंग छिड़ी थी। कन्नौज नरेश के आदेश पर उनका भांजा/सेनापति लाखन सिंह अपने लाव-लश्कर के साथ संभल आए और पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध में हरियाली तीज के ही दिन वीरगति को प्राप्त हो गए थे। सेनापति के ना रहने पर उनके साथ आई कन्नौज की शेष बची सेना यह सोंच कर कन्नौज वापस नहीं गई कि बिना सेनापति के जाकर कन्नौज नरेश की नजरों का सामना कैसे करेंगे। यही सोचकर वह नहीं गए और संभल में एक वीरान स्थान पर बस गए। यह क्षेत्र आज मोहल्ला हल्लूसराय कहलाता है। यहां बसने वाले कन्नौज के निवासी हैं, इसलिए इन्हें कन्नौजिया कहा जाता है। सेनापति की मृत्यु हरियाली तीज के दिन हुई थी, इसलिए लोग आज भी हरियाली तीज को शोक मनाते हैं।