इसके पहले मौलाना साद कांधलवी ने अपने तकरीर में इज्तिमा में आए लाखों मुसलमानों से गुनाहों से दूर रहने और हुजूर की सुन्नतों पर अमल करने की नसीहत की। कहा कि ईमान की बात पर अमल करो। इंसानियत के लिए जियो। अल्लाह के नबी ने जिंदगी जीने का जो तरीका दिया है उसे असल जिंदगी में उतारो।
इज्तिमा के आखिरी दिन सोमवार को मौलाना साद कांधलवी ने अपने तीन घंटे की तकरीर में सबसे ज्यादा जोर नमाज पर दिया। नमाज को मजहब-ए-इस्लाम की धुरी बताया। नमाज का पाबंद रहने की सीख दी। कहा कि अगर कोई मुसलमान नमाज नहीं पढ़ रहा है तो उसका दीनी काम में कोई योगदान नहीं है। नमाज ही वो जरिया है, जिसके सहारे मुसलमान अल्लाह तआला के करीब आता है। पांच वक्त नमाज पढ़ने और नबी-ए-करीम की सुन्नतों पर अमल करने से जिंदगी में बदलाव आता है। नबी-ए-करीम के बताए तरीके से नेक नीयत के साथ नमाज अदा करने से अल्लाह आपके लिए राजी हो जाता है।
जिंदगी में अधिक से अधिक अल्लाह का जिक्र करें। दिखावे के लिए कोई काम न करें। आखिर में दुआ कराई गई। दुनियावी जिंदगी को दीन के मुताबिक जीने और आखिरत को बनाने के लिए अल्लाह से तौफीक मांग रहे थे। इसके बाद दीनी तब्लीगों जमातों को दीनी बातों को लोगों के बीच ले जाने और दीन की दावत देने के लिए रवाना किया गया।
समझ में न आए दीनी बात तो उलमा से लें जानकारी
संभल। मौलाना साद कांधलवी ने कहा कि कुरआन को पढ़ें और समझें। अगर कोई दीनी बात न समझ में आए तो उलमा से जानकारी हासिल करें। सही बात का जिक्र सबके साथ करें। जिक्र के बगैर इल्म जुल्मत ही जुल्मत है। लेकिन सिर्फ जिक्र करना ही काफी नहीं है। उससे ज्यादा जरूरी है कि जो इल्म आपने हासिल किया है उस पर अमल करें। अगर आप दीनी इल्म के तौर तरीकों को अपनाए बगैर कोई काम करते हैं तो उस पर एतबार नहीं किया जा सकता है। दीनी इल्म ही वो जरिया है, जिसके जरिए सही गलत के बारे में आसानी से फैसला ले सकते हैं।
पैगाम-ए-नबी को घर-घर पहुंचाने निकलीं 600 तब्लीगी जमातें
दीनी इज्तिमा में लाखों लोगों ने दीनी काम के लिए इरादा किया। दीन की राह में घर से निकले वाले भी कम नहीं रहे। इज्तिमा में छह सौ से अधिक नई तब्लीगी जमातें तैयार हुईं, जिन्हें उलमा ने पैगाम-ए-नबी को घर-घर पहुंचाने और नसीहतों के साथ रवाना किया। मुसलमानों को दीनदार बनाने के लिए तब्लीगी जमात में शामिल युवा और बुजुर्ग उत्साह से लबरेज दिखे।
संभल में तीन दिन चले इज्तिमा में तब्लीगी जमातों में शामिल एक लाख से अधिक अकीदतमंद पहुंचे। जहां हर तकरीर के बाद नई जमातें तैयार होती रहीं। तमाम लोगों ने खुद ब खुद जमात में जाने की ख्वाहिश जताई। उनके नाम लिखने के बाद जमातों को तैयार किया गया। तैयार की गईं नई जमातों को दुआ के बाद रवाना किया गया। ये तब्लीगी जमातें पांच महीने से लेकर चालीस दिन तक अलग-अलग शहरों में दीन की खिदमत करेंगी। जोहर की नमाज के बाद शुरू हुआ ये सिलसिला देर रात तक चलता रहा।