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जीएसटी में नहीं मिल रहे रिफंड, मैंथा निर्यातकों के 80 करोड़ रुपये फंसे

Tue, 21 Nov 2017 01:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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निर्यात किए गए मैंथॉल उत्पादों पर व्यापारियों को आईटीसी नहीं मिल पा रही है। अकेले मैंथा इंडस्ट्री के 80 करोड़ रुपये से अधिक फंस गए हैं। व्यापारियों को अपने टर्नओवर को रफ्तार देने के लिए बैंकों से कर्ज लेना पड़ रहा है। एक तरफ उन्हें कार्यशील पूंजी के लिए ब्याज देना है। दूसरी तरफ रिफंड में फंसी धनराशि पर ब्याज मिलने के आसार नहीं हैं क्योंकि जीएसटीएन पोर्टल में आईटीसी क्लेम की प्रक्रिया पेचीदा है।
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ब्योरे अपलोड करने के बाद ब्योरे का मिलान नहीं होने का मैसेज व्यापारियों के पास आ रहा है। जब वह मैसेज के आधार पर ब्योरे मैच कराने के लिए पोर्टल पर क्लिक करते हैं तो उन्हें शुद्धिकरण के लिए सॉफ्टवेयर में ऑप्सन नहीं मिलते। यही वजह है कि अधिकतर निर्यातकों के आईटीसी रिफंड फंसे हुए हैं। संभल और दिल्ली से मैंथा प्रोडक्ट का निर्यात करने वाले हिमांशु अग्रवाल का कहना है कि बड़ी बड़ी कंपनियों के रिफंड फंसे हैं। पोर्टल पर बार बार क्लिक करने से भी समाधान नहीं मिल रहा है। हैरत की बात यह है कि प्रक्रिया पेचीदा होने और पोर्टल की दिक्कतों का खामियाजा कारोबारी भुगत रहे हैं। उन्हें दोहरा नुकसान है।

ब्योरे का मिलान न होने संबंधी एक मैसेज देकर विभाग रिफंड पर ब्याज की जिम्मेदारी से भी बचने का प्रयास कर रहा है। निर्यातकों का कहना है कि अगर जीएसटीएन पोर्टल पर आ रही दिक्कतों को दूर कर दिया गया होता तो रिफंड की धनराशि न फंसती। मैंथा निर्यातकों ने जीएसटीएन पोर्टल पर ऑनलाइन रिटर्न भरने की प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों को उठाया है। निर्यातकों का कहना है कि सिर्फ व्यापारियों को डाटा मिस मैच होने की जानकारी देकर विभाग अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रहा है जबकि माल निर्यात होने के एक महीने में ही रिफंड मिल जाने का नियम है पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
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