God killed Kansa by slamming the wrestlers
- फोटो : CHANDAUSI
गणेश मंदिर के गजानन हाल में चल रही रासलीला में कलाकारों ने कंस वध का मंचन किया। कंस वध के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गजानन हाल गूंज उठा। आयोजन श्री आदर्श कल्याणमयी बालकृष्ण कला मंडल के कलाकारों ने किया।
मंचन में दिखाया कि अत्याचारी कंस का दरबार लगा हुआ है। राज दरबार में मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके द्वारा किए गए राक्षसों के वध से चिंतित कस अपने मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है। दरबार के बुद्धिजीवियों की सलाह पर कंस भगवान श्रीकृष्ण को मथुरा आने का निमंत्रण देता है। कहता है कि मथुरा में मेला लगा है और मल्ल युद्ध होगा। गोकुल में रह रहे भगवान श्रीकृष्ण कंस के भाव को समझ जाते हैं और और गोकुल वासियों से विदा लेकर भाई बलराम के साथ मथुरा के लिए चल देते हैं। कंस रास्ते में ही श्री कृष्ण को मारने के लिए धोबी को भेजता है। भगवान कृष्ण उसका वध करके मथुरा की ओर चल देते हैं। मथुरा में प्रवेश करने के बाद भगवान कृष्ण की भेंट कंस के दर्जी, माली से होती है।
वह भगवान कृष्ण को देखकर उनके भक्त बन जाते हैं और आराधना में लग जाते हैं। मेले में भ्रमण के समय कृष्ण की भेंट कंस के माथे पर चंदन लगाने वाली कुब्जा से होती है। भगवान कुब्जा की भक्ति देखकर उसे एक सुंदर स्त्री का रूप देते हैं। यहां से आगे बढ़ने पर एक बार फिर से कंस भगवान कृष्ण को मारने का प्रयास करता है और हाथी को मदिरा पिला कर रास्ते में छोड़ देता है। मदमस्त हाथी मेले में उत्पात मचाता है। उसके बाद उसका सामना बलराम व श्री कृष्ण से होता है। बलराम एक ही वार से मदमस्त हाथी को अचेत कर देते हैं। मेला भ्रमण करने के बाद बलराम सहित भगवान कृष्ण दंगल देखने पहुंचते हैं। जहां पर कंस ने श्री कृष्ण और बलराम को मारने के लिए बड़े-बड़े पहलवान बुलवाए थे। दोनों भाई पहलवानों को अखाड़े में ही मार डालते हैं और सिंहासन पर बैठे कंस को उठाकर नीचे फेंक देते हैं। नीचे सीढ़ियों पर गिरते ही कंस की मृत्यु हो जाती है। रासलीला में कंस का अभिनय प्रेम कुमार ने, धोबी का अभिनय प्रिंस शर्मा ने, भगवान कृष्ण का अभिनय मुनेश शर्मा ने, बलराम का अभिनय विकास दुबे ने किया।