संभल। असमोली ब्लॉक क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में किताबों का वितरण आधा अधूरा करा दिया गया। कहीं एक किताब मिली है तो कार्य पुस्किता नहीं मिली तो कहीं कई कई किताबों की कमी है तो किसी कक्षा में कोई किताब ही नहीं दी गई। खंड शिक्षा अधि कारी वितरण कार्य कराए जाने का दावा कर रहे हैं। शिक्षा सत्र आधा गुजरने को है लेकिन किताबों का ही वितरण जिम्मेदार नहीं करा पा रहे हैं। सवाल उठता है कि कैसे शिक्षा के स्तर में सुधार किया जा सकता है।
बुधवार को परिषदीय विद्यालयों में किताबों की पड़ताल की तो ज्यादातर बच्चे बिना किताब या पुरानी किताब से पढ़ाई करते मिले। नई किताबें बीआरसी केंद्रों में भरी पड़ी है। तर्क है कि किताबें पूरी नहीं है। असमोली ब्लॉक क्षेत्र में वितरण किए जाने का दावा किया। जिसकी पड़ताल की तो सामने आया कि पहली और दूसरी कक्षा में हिंदी की किताब मिल गई है, लेकिन कार्य पुस्तिका नहीं मिली। कक्षा तीन में गणित की किताब नहीं मिली है। कक्षा चार और पांच में गणित और विज्ञान की किताब की कमी है। कक्षा छह और सात के विद्यार्थियों को मात्र हिंदी की किताब दी गई है। अन्य किसी विषय की किताब नहीं मिली है। कक्षा आठ के बच्चों को कोई किताब ही नहीं मिली है।
असमोली के खंड शिक्षा अधिकारी सुल्तान अहमद ने बताया कि जिले पर ही किताबे पूरी नहीं है। जितनी हमें मिल रही हैं उतनी का वितरण करा रहे हैं। जिले से किसी का टेंडर हुआ है। उन्हीं की जिम्मेदारी है कि वह विद्यालयों में पूरी किताबों का वितरण कराएं। चार न्याय पंचायत क्षेत्र के विद्यालयों में किताबों का वितरण करा दिया गया है। बाकी की तीन न्याय पंचायत क्षेत्र के विद्यालयों में वितरण कराया जाना है।
पवांसा बीआरसी पर 50 प्रतिशत किताबें पहुंची, वितरण नहीं हुआ
संभल। पवांसा बीआरसी केंद्र के 202 विद्यालयों में किताबों का वितरण किया जाना है। बीआरसी पर करीब 50 प्रतिशत किताबें पहुंच गई हैं लेकिन वितरण नहीं हुआ है। खंड शिक्षा अधिकारी मुंशी लाल पटेल ने बताया कि फिलहाल सभी परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएं पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं। शुक्रवार से जो कार्यालय में किताबें हैं उनका वितरण कराया जाएगा।
संभल बीआरसी केंद्र पर भरी पड़ी किताबें, वितरण का इंतेजार
संभल। संभल बीआरसी केंद्र पर किताबें भरी पड़ी है लेकिन वितरण नहीं हुई हैं। कर्मचारियों ने बताया कि वितरण की जिम्मेदारी जिला स्तर से किसी को दी गई है। उन्हीं की जिम्मेदारी है कि वह किताबों का वितरण करें। बीआरसी पर किताबें रखी हैं लेकिन कितनी हैं इसकी भी जानकारी नहीं है। सवाल उठता है कि इस हीलाहवाली से किताबों का वितरण किया जाएगा तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार कैसे हो पाएगा। इस हीलाहवाली को जिला स्तरीय अधिकारी भी नहीं देख पा रहे हैं।
14 लाख से ज्यादा किताबों का वर्क ऑर्डर है, दस लाख करीब किताबें पहुंची
संभल। जिले के 1289 परिषदीय विद्यालयों में 1406669 किताबों का वर्क ऑर्डर दिया गया है। अभी जिला मुख्यालय पर दस लाख करीब किताबें ही पहुंच सकी है। इन किताबों में भी किस विषय की किताबें पूरी हैं या अधूरी हैं इसकी जानकारी जिम्मेदारों को नहीं है। बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुसार 5 सितंबर तक किताबों को दिया जाना है। सवाल उठता है कि जब सितंबर तक किताबें आएंगी तो बच्चे नई किताबों से कब पढ़ सकेंगे। पुरानी किताबें पूरी हो तब तो ठीक है लेकिन काफी संख्या में ऐसे भी बच्चे हैं जो बिना किताबों के या आधी अधूरी किताबों के पढ़ाई कर रहे हैं। इस प्रक्रिया से शिक्षा में सुधार किया जाना संभव नहीं है।