चंदौसी। गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण में अभी तक अनुसूचित जाति के किसानों की जमीन के बैनामे नहीं हुए हैं। परमिशन आड़े आ रही है। परमिशन में जमीन अधिग्रहण का विकल्प न होने के कारण प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। इस मामले में संभल डीएम ने शासन को पत्र लिखकर जमीन अधिग्रहण के लिए सामूहिक परमिशन देने की बात कही है।
संभल जनपद के 31 गांवों से होकर गंगा एक्सप्रेस-वे गुजर रहा है। फरवरी माह से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है और बैनामे के लिए शासन से 450 करोड़ रुपये भी जिला प्रशासन को मिल चुके हैं। प्रशासन के आदेश पर संभल व चंदौसी तहसील के तहसीलदार रोजाना ग्रामीणों से संपर्क कराकर अधिग्रहण के लिए बैनामे करा रहे हैं।
जिले के 31 गांव में करीब 200 से अधिक अनुसूचित जाति के किसान हैं, जिनकी भूमि गंगा एक्सप्रेस-वे में आ रही है। अनुसूचित जाति के किसान को जमीन बेचने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी जरूरी है। जिन बिंदुओं पर प्रशासन जमीन बेचने की अनुमति देता है, उनमें जमीन अधिग्रहण शामिल नहीं है। इस कारण उनका बैनामा नहीं हो पा रहा है।
डीएम ने इस परमिशन देने में असमर्थता जताई है। सामूहिक रूप से परमिशन के लिए शासन को पत्र लिखा है। ताकि जमीन अधिग्रहण का कार्य पूरा करा लिया जाए।
प्रशासन इनमें से एक बिंदु के आधार पर जमीन बेचने की दे सकता है परमिशन
- अनुसूचित जाति के किसान के पास पांच एकड़ से अधिक जमीन हो
- परिवार में कोई गंभीर बीमार हो, (उसके उपचार के प्रमाण पत्र दिखाने होते हैं)
- शादी विवाह के लिए भी जमीन बेच सकते हैं।
जुलाई में निर्माण कार्य शुरू होने का दावा कर रहे अधिकारी
गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण से जूडे़ यूपीडा और प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि जमीन अधिग्रहण का काम तेजी के साथ चल रहा है। शासन ने भी जुलाई माह से निर्माण कराने के आदेश दिए हैं। शासन के आदेशों का हर हाल में पालन कराया जाएगा। जुलाई माह से पहले ही जमीनों का बैनामा करा लिया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए किसानों की जमीनों का बैनामा कराया जा रहा है, पर अभी तक अनुसूचित जाति की जमीन अधिग्रहण के लिए परमिशन जरूरी है। प्रशासन से परमिशन नहीं मिली है। डीएम की ओर से शासन को पत्र लिख गया है, जिसमें सामूहिक रूप से जमीन अधिग्रहण के लिए परमिशन दिलाने की बात कही है। मनोज कुमार सिंह, तहसीलदार चंदौसी