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59 साल में पहली बार शोभायात्रा और मेले के बिना विराजमान हुए गणपति महाराज

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चंदौसी में गणेश चतुर्थी पर रंग-बिरंगी बिजली की झांलरों से सजा गणेश मंदिर। - फोटो : CHANDAUSI
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चंदौसी। कोरोना संक्रमण के चलते उत्तर भारत में प्रसिद्ध चंदौसी में गणेश चतुर्थी पर 59 साल में पहली बार बिना शोभायात्रा और गणेश मेले के गणपति महाराज का विधिविधान से पूजन किया गया और उन्हें गणेश मंदिर में विराजमान कराया गया। इसके बाद पूजन के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के साथ श्रद्धालुओं की लाइन लग गई।
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शनिवार को गणेश चतुर्थी पर सुबह को पंडित भूदेव शंखधार और पंडित अनिल कुमार शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणेश मंदिर संस्थापक डा. गिरिराज किशोर गुप्ता के साथ विधिवत मंदिर में पूजन कराया। गणपति महाराज की जय, मंगलमूर्ति मोरया, गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से मंदिर गूंज उठा। इस मौके पर गणेश मेला परिषद परिवार के सदस्य रोहित शाह, कमलेश चौधरी, मनोज गुप्ता, ललित किशोर, सुधीर कुमार, रविंद्र कुमार रूपी, राजीव कुमार, अभिषेक आदि रहे।
करीब पांच हजार लोगों ने किया पूजन
गणेश मंदिर में पूजन के बाद श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लग गई। इस दौरान श्रद्धालु सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मास्क लगाए नजर आए। चंदौसी में गणेश चतुर्थी पर घरों में गणपति प्रतिमा स्थापित करने से पहले गणेश मंदिर में पूजन कराया जाता है। सुबह छह बजे से दोपहर दो बजे तक श्रद्धालुओं की लाइन लगी रही। इनमें अधिकांश लोग गणेश प्रतिमा के साथ और कुछ लोग श्रद्धा भाव से पूजा करने आए थे। गणेश मेला पदाधिकारियों के मुताबिक इस बार करीब पांच हजार लोग ही पूजन के लिए मंदिर पहुंच पाए। पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने अपने घरों में गणपति प्रतिमाएं स्थापित की।
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प्रति वर्ष विशाल एवं भव्य शोभायात्रा निकलती थी
श्री गणेश मेला परिषद के कार्यवाहक प्रबंधक मनोज गुप्ता ने बताया कि पिछले 59 सालों से चंदौसी में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। 59वें भव्य एवं विशाल आयोजन पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि गणेश चतुर्थी का पर्व बिना मेले और भव्य शोभायात्रा के शुरू हुआ है। चंदौसी में गणेश चतुर्थी पर सुबह महापूजन के बाद देश की प्रसिद्ध स्वचालित झांकियां, गाजे बाजे, सैकड़ों झांकियों के साथ शोभायात्रा निकाली जाती थी। शाम को शोभायात्रा की समाप्ति पर महाआरती का आयोजन होता था।
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