वह नेता अब अकेले हो गए हैं ? क्योंकि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद पुलिस अधीक्षक ने स्थानीय तौर पर जिला कमेटी की संस्तुति पर दिए गए गनर वापस कर लिए हैं।
राज्य सरकार व सियासत में रसूखदारों ने अपने प्रभाव से अपनी सुरक्षा के लिए गनर ले रखे थे। सत्तारूढ़ के साथ साथ कई अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी जान माल को खतरा बताते हुए वर्दीधारी गनर ले रखे थे। जिन्हें लेकर नेता पार्टी की बैठकों से लेकर शादी ब्याह बारातों तक घूमते थे। साथ में वर्दीधारी सुरक्षा की हनक दिखाते थे। हालांकि इस पर अधिकांश नेताओं ने निजी खर्चे पर गनर ले रखे थे, लेकिन चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद इन गनर्स को वापस ले लिया गया है। विधायकों व सांसदों की सुरक्षा को दो दो गनर रहेंगे।
न्यायालय के आदेश पर जिले में अजय अग्रवाल आदि की सुरक्षा तो बरकरार रहेगी लेकिन अन्य नेताओं की सुरक्षा में लगे गनर हटा लिए गए हैं, जिसमें कुछ सियासी जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं।
दो दिन पहले ही संभल के एक बड़े नेता ने कैबिनेट मंत्री के काफिले में सरकारी गाड़ी होने पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत की तो एसपी ने तत्काल ही सरकारी वाहन का प्रयोग नहीं करने के दिशा निर्देश जारी किए।