बिल्सी के किसानों के राहत चेकों पर नाम मिटाकर करोड़ों के घोटाले पर बदायूं जिला प्रशासन की शिथिलता गले नहीं उतर रही है। इस कहानी के कई किरदारों की भूमिका संदिग्ध है।
जिला प्रशासन के मुताबिक किसानों के नाम से बनाए गए चेकों पर तहसीलदार ने हस्ताक्षर किए थे। ऐसे में इस सवाल का जवाब नहीं दिया जा रहा है कि, अलग-अलग बनाए गए सारे चेक कैसे एक ही व्यक्ति के पास पहुंच गए। वहीं सभी चेकों से नाम, भरी गई धनराशि मिटाकर दूसरे अंकन के बावजूद बैंक में न पकड़े जाने से भी सवाल उठ रहा है।
अधिकांश लोगों का मानना है कि राजस्व विभाग के अफसरों ने अग्रिम हस्ताक्षर करके ब्लैंक चेकों को ही बिचौलियों के हवाले कर दिया था। इसमें बैंक के अफसरों-कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है। इसके अलावा जिस तरह बदायूं जिला प्रशासन तहसीलदार को बचाने के लिए फिक्रमंद नजर आ रहा है। इसमें फर्जीवाड़े के तार और भी अफसरों से जुड़ सकते हैं।
बिल्सी तहसील के सैकड़ों किसानों के नाम जारी राहत चेकों से उनके नाम मिटाकर दूसरे नाम और धनराशि अंकित कर रुपये हड़पने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में अल्ट्रावायलेट लैंप (यूबीएल) लगे रहते हैं, जिसकी किरणें चेक पर पड़ते ही सभी कुछ पता चल जाता है, चाहे उस पर कितनी सफाई से छेड़छाड़ की गई हो।
चाहे ओवरराइटिंग हो, मिटाकर दोबारा नाम या धनराशि लिखी गई हो या फिर चेक नकली हो, ऐसे में बिना अगर-मगर के चेक पास किए जाने से भी प्रशासन की कहानी पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं बहजोई के व्यापारियों का कहना है कि चेक उन्हें नहीं दिया गया।
किशन यादव ने उनसे खाता नंबर पूछा और खुद ही बैंक जाकर चेक काटकर धनराशि उनके खातों में जमा करा दी। अब जिला प्रशासन अपने तहसीलदार व लेखपालों को बचाने की कवायद में जुटा है। नौ दिनों के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं घोटाले का मामला सामने आने के बाद बहजोई में पीएनबी की स्थानीय शाखा के अफसर फोन बंद किए हुए हैं।
जांच में सामने आएगा ब्लैंक चेक बुक पहुंची या चेक
ब्लैंक चेक बुक दी गई या फिर किसानों के नाम जारी चेकों से नाम मिटाकर गलत नाम व धनराशि अंकित की गई, इसकी जांच की जा रही है। बैंक शाखा की भूमिका भी संदिग्ध है, इसकी भी जांच की जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -आरपी सिंह यादव, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) बदायूं