मुरादाबाद। मैनाठेर बवाल में शुरुआत से ही सियासत होती रही। सरकार और पुलिस के खिलाफ नेताओं ने जगह जगह प्रदर्शन किए और दर्ज मुकदमों को खत्म कराने की मांग शुरू हो गई। इस घटना के अगले साल ही विधानसभा चुनाव हुए और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इन मुकदमों को खत्म करने का काम शुरू कर दिया गया। तीन मुकदमों में एफआर लगा दी गई जबकि डीआईजी पर हमले समेत तीन मुकदमों में चार्जशीट तो दाखिल की गई लेकिन दो मुकदमे वापस कर लिए गए थे। बस एक ही मुकदमा सुनवाई तक पहुंचा और 16 आरोपी दोषी करार दिए गए हैं। इन्हें 27 मार्च को सजा सुनाई जाएगी।
छह जुलाई 2011 को मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा में दबिश के दौरान पुलिस पर धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाकर लोगों ने हंगामा किया था। संभल मुरादाबाद मार्ग पर तीन जगह जाम लगाकर प्रदर्शन किया गया था। मैनाठेर थाने और डींगरपुर पुलिस चौकी में आग लगा दी गई थी। पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट की गई थी। पीएसी के वाहन भी आग के हवाले कर दिए गए थे। घटना की सूचना पर पहुंचे तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार को भी भीड़ ने घेर लिया और मरणासन्न हालत में पहुंचा दिया था। इस मामले में छह मुकदमे दर्ज किए गए थे। घटना बाद से ही सियासत हावी हो गई थी। छह मुकदमों में सैकड़ों आरोपी बनाए गए थे लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार ने तीन मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर थी जबकि पुलिस ने तीन अन्य मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमले वाले मुकदमे में उनके पीआरओ रवि कुमार वादी थे। इस मामले में भी 15 साल सुनवाई चली है। 27 मार्च को 16 दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।